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10 June 2018

भारत और चीन ने ब्रह्मपुत्र जल डेटा साझाकरण और गैर-बासमती चावल निर्यात पर 2 समझौतों पर हस्ताक्षर किये

चीन के राष्ट्रपति शी चिनफिंग से छह हफ्ते के भीतर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की दूसरी मुलाकात के दौरान शनिवार को दो महत्वपूर्ण समझौते हुए. चीन ब्रह्मपुत्र नदी के प्रवाह के स्तर से जुड़ी सूचनाएं साझा करने के लिए तैयार हो गया है।.शनिवार को दोनों नेताओं के बीच द्विपक्षीय वार्ता के बाद MoU पर हस्ताक्षर किए गए. पिछले साल डोकलाम विवाद के चलते चीन ने भारत के साथ ब्रह्मपुत्र के प्रवाह से जुड़े आंकड़े साझा करने बंद कर दिए थे. आपको बता दें कि प्रधानमंत्री मोदी शंघाई सहयोग संगठन (SCO) के दो दिवसीय वार्षिक शिखर सम्मेलन में शामिल होने के लिए यहां पहुंचे हैं.

बाढ़ के मौसम में ब्रह्मपुत्र में जल-प्रवाह के स्तर से जुड़ी सूचनाओं के आदान-प्रदान के इस करार को काफी महत्वपूर्ण माना जा रहा है. भारत के जल संसाधन, नदी विकास एवं गंगा पुनर्जीवन मंत्रालय और चीन के जल संसाधन मंत्रालय के बीच हुए समझौते के तहत चीन हर साल बाढ़ के मौसम यानी 15 मई से 15 अक्टूबर के बीच ब्रह्मपुत्र नदी में जल-प्रवाह से जुड़ी सूचनाएं भारत को उपलब्ध कराएगा।.इसके साथ ही बरसात के बाद अगर नदी में जलस्तर परस्पर सहमति से तय सीमा से ऊपर जाता है तो उसकी भी जानकारी चीन भारत को देगा. दूसरा समझौता भारत से गैर-बासमती चावल खरीद पर सहमति का है. चीन के भारत से गैर-बासमती चावल का आयात करने से व्यापार को संतुलित करने में कुछ हद तक मदद मिल सकती है. अभी दोनों देशों के बीच व्यापार में चीन का निर्यात बहुत अधिक है.
 
चीन द्वारा आयात किए जाने वाले गैर-बासमती चावल की स्वच्छता और उसकी गुणवत्ता बेहतर होने की व्यवस्था सुनिश्चित करने के नए करार पर चीन के सीमा शुल्क प्रशासन और भारत के कृषि, सहकारिता और किसान कल्याण विभाग की ओर से हस्ताक्षर किए गए. इसके तहत भारत प्रमाणित गैर-बासमती चावल का चीन को निर्यात कर सकेगा. चीन दुनिया के सबसे बड़े चावल बाजारों में से एक है. फिलहाल चीन भारत से केवल बासमती चावल का आयात करता है. इससे संबंधित प्रोटोकॉल पर 2006 में सहमति बनी थी. दोनों देशों के बीच अब इस प्रोटोकॉल में संशोधन किया है जिसके तहत भारत अब गैर-बासमती चावल भी चीन को निर्यात कर सकेगा.

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