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02 June 2018

राष्ट्रपति ने कैलाश सत्यार्थी को एक करोड़ रूपये के "संतोकबा ह्यूमैनेटेरियन अवार्ड" से सम्मानित किया

राष्ट्रपति राम नाथ कोविंद ने बाल अधिकार कार्यकर्ता और नोबल पुरस्कार विजेता कैलाश सत्यार्थी और गुजरात के सूरत में भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो) के अध्यक्ष अंतरिक्ष वैज्ञानिक ए एस किरण कुमार को 'संतोकबा ह्यूमैनेटेरियन अवार्ड' से सम्मानित किया. यह पुरस्कार श्री रामकृष्ण ज्ञान फाउंडेशन (SRKKF) द्वारा स्थापित किया गया था और इसका नेतृत्व हीरा व्यापारी गोविंद ढोलकिया ने किया. इस पुरस्कार में एक ट्रॉफी और 1 करोड़ रुपये का पुरस्कार राशि शामिल है.
समारोह को लेकर शनिवार को एसआरके फाउंडेशन के प्रमुख गोविंद धोलकिया ने बताया कि कैलाश सत्यार्थी को बालकों के सर्वांगीण विकास तथा बालश्रम के उन्मूलन में विशिष्ट योगदान के लिए दुनिया के सबसे प्रतिष्ठित नोबेल पुरस्कार से सम्मानित किया गया है. वहीं, इसरो के वैज्ञानिक किरण कुमार ने अपनी उपलब्धियों से देश का नाम दुनिया में रोशन किया है. संतोकबा अवॉर्ड की शुरुआत वर्ष 2007 में की गई थी. इसके पीछे एसआरके के ही एक साथी निखिल की सोच थी. इस अवॉर्ड से दलाई लामा, रतन टाटा , डॉ. सुधा मूर्ति, सेम पित्रोदा, डॉ.वर्गिस कुरियन, डॉ. एच.एल. त्रिवेदी, समेत ग्यारह हस्तियों को सम्मानित किया जा चुका है.

धोलकिया ने बताया कि पूर्व राष्ट्रपति डॉ.एपीजे अब्दुल कलाम ने सूरत आगमन के दौरान ग्रामीण क्षेत्रों मेंं लोगों के स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं पर चर्चा की थी. उन्होंने विकसित देशों की तरह समय-समय पर ग्रामीणजनों के स्वास्थ्य की जांच की बात कही थी. उस समय एसआरके कलाम प्रोजेक्ट पर विचार किया गया था. इस प्रोजेक्ट के तहत पिछले दिनों सौराष्ट्र के अमरेली जिले की तीन तहसील क्षेत्रों में 1 लाख 12 हजार लोगों के रक्त के नमूने लेकर 15 अलग-अलग तरह के टेस्ट किए गए. इनमें 81 लोग एचआईवी पॉजिटिव निकले तथा बीस हजार लोगों में खून की कमी पाई गई. 7 प्रतिशत लोग पीलिया रोग से ग्रसित पाए गए. पीडि़तों को उपलब्ध दवाएं तथा चिकित्सकों से संपर्क की सलाह दी गईं. स्वास्थ्य समस्याओं को लेकर सरकार को भी इस तरह के प्रयास करने चाहिए. यदि सरकार नहीं कर सके तो विभिन्न एनजीओ की मदद से तहसील स्तर पर इस तरह के कार्य किए जा सकते हैं.

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