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04 June 2018

सरकार ने नई योजना 'सेवा भोज योजना' शुरू की

केन्द्रीय संस्कृति मंत्रालय ने 'सेवा भोज योजना' नामक एक नई योजना शुरू की, जिसके तहत भोजन/प्रसाद लंगर/भंडारा पर केन्द्रीय वस्तु और सेवाकर (CGST) और एकीकृत वस्तु और सेवाकर (IGST) का केन्द्रीय सरकार का हिस्सा लौटा दिया जायेगा. जो धार्मिक संस्थानों द्वारा मुफ्त में पेश किया जा रहा है. यह योजना वित्तीय वर्ष 2018-19 और 2019-20 के लिए लॉन्च की गई है जिसमें 325.00 करोड़ रुपये का कुल परिव्यय है. धार्मिक संस्थाओं को जीएसटी से छूट देने को यह स्कीम बनाई गई है. योजना के तहत जब रसद खरीदी जाएगी तो धार्मिक-चेरीटेबल संस्था इसका पूरा जीएसटी भरेगी. बाद में वह सरकार को अपनी खऱीदी गई रसद का हिसाब
जमा कराएगी. जिस पर दिए सीजीएसटी की रकम को केंद्र सरकार योजना के तहत बनती रकम के रूप में वापस कर देगी.
 

केंद्र आवेदन के रजिस्ट्रेशन के लिए कमेटी बनाएगा, जो 4 हफ्ते में आवेदन रिव्यू करके फैसला करेगी कि सीजीएसटी-आईजीएसटी का रिफंड कैसे किया जाए. दर्पण पोर्टल पर जीएसटी के इस रिफंड के लिए धार्मिक संस्था को सबसे पहले 4 हफ्ते में रजिस्ट्रेशन कराना होगा. रिफंड के लिए आवेदन राज्य सरकार के पास ही देना होगा. 1 अप्रैल से, वित्त वर्ष 2018 की शुरूआत से जीएसटी वापस लेने के लिए क्लेम किया जा सकेगा. स्कीम के मुताबिक इसमें से वही टैक्स वापस होगा जो 1 अप्रैल के बाद भुगतान किया होगा. जबकि इससे पहले दिए गए जीएसटी की वापसी संबंधी अभी तक कुछ भी नहीं कहा गया है. जो संस्थाएं 5 साल से रजिस्टर्ड हैं और हर महीने कम से कम 5000 लोगों को लंगर खिला रही हैं उसे इस योजना का लाभ मिलेगा.

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