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29 June 2018

आतंक पर लगाम न कस पाने की वजह से पाक को झटका, FATF ने 'ग्रे लिस्ट' में डाला

पाकिस्तान को झटका देते हुए, फाइनैंशल ऐक्शन टास्क फोर्स ने आतंक की फंडिंग रोक पाने में विफल रहने की वजह से पाक को 'ग्रे लिस्ट' यानी संदिग्धों की सूची में डाल दिया है. बता दें कि FATF को पाकिस्तान ने 26 सूत्री ऐक्शन प्लान सौंपा था ताकि वह इस कार्रवाई से बच सके. हालांकि, पाकिस्तान एक बार फिर ब्लैक लिस्ट होने से बच गया है जो उसके लिए थोड़ी राहत की बात है. पाकिस्तान ने पूरा कूटनीतिक प्रयास किया था कि 37 सदस्य देशों वाले इस निकाय का फैसला उसके खिलाफ न जाए पर वह इसमें नाकाम रहा. यह फैसला बुधवार देर रात पैरिस में FATF के प्लेनरी सेशन में लिया गया, जहां पाकिस्तान का प्रतिनिधित्व उसके वित्त मंत्री शमशाद अख्तर कर रहे थे.
पाकिस्तान की ओर से 15 महीनों का एक ऐक्शन प्लान रखा गया और बताया गया कि उसके यहां मनी लॉन्ड्रिंग और आतंकवादिकयों का धन का रास्ता बंद करने के क्या उपाय किए गए हैं. एफएटीए ने इसके एक दिन बाद अपने निर्णय की घोषणा की. हालांकि, ग्रे लिस्ट में जाने से भी पाकिस्तान की अर्थव्यवस्था पर असर पड़ सकता है. इससे बहुराष्ट्रीय कंपनियों के निवेश पर भी विपरीत असर पड़ता है. FATF के मुताबिक पाकिस्तान अब एक साल या उससे ज्यादा समय के लिए इस लिस्ट में रहेगा. हालांकि, उसे समय से पहले इस सूची से हटाया भी जा सकता है, जैसा कि पहले भी हो चुका है.

बता दें कि इससे पहले पाकिस्तान साल 2012 से 2015 तक FATF की ग्रे लिस्ट में रहा है. पाकिस्तान के खिलाफ यह प्रक्रिया फरवरी 2018 में शुरू हुई थी जब एफएटीएफ ने अपने अंतरराष्ट्रीय सहयोग समीक्षा समूह के तहत निगरानी के पाकिस्तान के नामांकन को मंजूरी दी थी. इसे ग्रे सूची के नाम से जाना जाता है. FATF पैरिस स्थित अंतर-सरकारी संस्था है. इसका काम गैर-कानून आर्थिक मदद को रोकने के लिए नियम बनाना है. इसका गठन 1989 में किया गया था. FATF की ग्रे या ब्लैक लिस्ट में डाले जाने पर देश को अंतरराष्ट्रीय संस्थाओं से कर्ज मिलने में काफी कठिनाई आती है.

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