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28 July 2018

ब्रिक्स शिखर सम्मेलन 2018 का समापन: जोहान्सबर्ग घोषणापत्र अपनाया गया

ब्रिक्स शिखर सम्मेलन का 10 वां संस्करण जोहान्सबर्ग, दक्षिण अफ्रीका में संपन्न हुआ. यह 3 दिवसीय लंबा शिखर सम्मेलन था और सभी ब्रिक्स नेता इसमें शामिल थे. इस शिखर सम्मेलन का विषय ‘BRICS in Africa: Collaboration for inclusive growth and shared prosperity in the 4th Industrial Revolution' था. भारतीय प्रधान मंत्री नरेंद्र मोदी तीन अफ्रीकी देशों के यात्रा के दौरान रवांडा और युगांडा होते हुए दक्षिण अफ्रीका पहुचे जहाँ पीएम मोदी दक्षिण अफ्रीका के जोहानिसबर्ग में होने वाले BRICS सम्मेलन में शामिल हुए. इस बार ब्रिक्स सम्मेलन की मेजबानी दक्षिण अफ्रीका कर रहा है. 

साउथ अफ्रीका की राजधानी जोहान्सबर्ग में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 10वें ब्रिक्स शिखर सम्मेलन में कहा कि पिछले 4 वर्षों से हमारी सरकार ने अफ्रीका में विकास और शांति को प्राथमिकता दी है. पीएम मोदी ने कहा कि हमने 40 से अधिक देशों को 11 बिलियन डॉलर की क्रेडिट लाइन (डॉलर कर्ज) दिया है और इंडियन प्राइवेट सेक्टर ने अफ्रीकी देशों में 54 बिलियन डॉलर का निवेश किया है. पीएम मोदी ने स्पेशल रिट्रीट सेशन के दौरान कहा कि मैं आश्वस्त हूं कि हमारे नए विचार और प्रभावशाली कदम से ब्रिक्स के आपसी सहयोग को मजबूत मिलेगी और एक नई दिशा तय करेगा. पीएम मोदी ने कहा कि भारत के खुद के विकास में दक्षिण का सहयोग काफी महत्वपूर्ण रहा है. पीएम मोदी ने कहा कि हमारे विकास के अनुभवों को अन्य विकासशील देशों के साथ साझा करना हमारी प्राथमिकता रही है और आगे भी रहेगी.

शिखर सम्मेलन में सभी ब्रिक्स नेता एक साथ आऐ और अंतरराष्ट्रीय और क्षेत्रीय मुद्दों की विभिन्न आम चिंताओं पर चर्चा की और सर्वसम्मति से 'जोहान्सबर्ग घोषणापत्र' को अपनाया. ब्रिक्स नेताओं ने बढ़ते एकतरफावाद को खारिज करने के लिए शिखर सम्मेलन का उपयोग किया और इसके बजाय बहुपक्षीय संस्थानों को सुदृढ़ करने के लिए अपनी वचनबद्धता को दोहराया, सदस्य देशों के अंतर्गत मजबूत अंतर-व्यापार की मांग की गयी. घोषणापत्र संयुक्त राज्य अमेरिका और चीन के टैरिफ पर एक व्यापार युद्ध के गतिरोध के रूप में आया है.
BRICS दुनिया की पांच उभरती हुई अर्थव्यवस्थाओं का एक समूह है. इसमें B- ब्राजील, R- रूस, I- इंडिया, C- चीन और S- साउथ अफ्रीका है. जुलाई, 2006 में G-8 आउटरीच शिखर सम्मेलन के मौके पर रूस, भारत, चीन के नेताओं की बैठक में इस ग्रुप को बनाने की प्रक्रिया शुरू हुई. जिसके बाद पहले ब्रिक्‍स सम्मेलन का आयोजन रूस के येकाटेरींबर्ग में 16 जून 2009 को हुआ था. BRICS पहले BRIC के नाम से जाना जाता था. तब इस समूह में ब्राजील, रूस, भारत और चीन शामिल था. 2011 में साउथ अफ्रीका के जुड़ने के साथ ही इसका नाम BRICS हो गया. ब्रिक्स सम्मेलन हर साल किसी सदस्य देश की मेज़बानी में होता है. भारत साल 2012 और साल 2016 में दो बार इस समिट की मेज़बानी कर चुका है.

ब्रिक्स की स्थापना का मुख्य उद्देशय अपने सदस्य देशों की सहायता करना है. ये देश एक दूसरे के विकास के लिए वित्तीय, तकनीक और व्यापार के क्षेत्र में एक दूसरे की सहायता करते हैं. ब्रिक्स देशों के पास खुद का एक बैंक भी है. इस बैंक का नाम New Development Bank है. इसका कार्य सदस्यों देशों और अन्य देशों को कर्ज के रूप में वित्तीय सहायता प्रदान करना है.

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