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29 July 2018

अंतर्राष्ट्रीय बाघ दिवस

बाघ संरक्षण के बारे में जागरूकता बढ़ाने के लिए हर साल 29 जुलाई को अंतरराष्ट्रीय टाइगर दिवस मनाया जा रहा है. मध्यप्रदेश में, राज्य टाइगर फाउंडेशन सोसाइटी ऑफ वन विभाग ने बाघ संरक्षण के लिए जागरूकता और समर्थन बढ़ाने के लिए 6 शहरों में दीवार चित्रकला प्रतियोगिता का आयोजन किया है. बाघों के संरक्षण के बारे में जागरूकता फैलाने के लिए इस दिवस को मनाया जाता है. 'वर्ल्‍ड वाइल्‍ड लाईफ फंड' के अनुसार पूरे विश्‍व में तीन हज़ार आठ सौ नब्‍बे बाघ बचे हैं, जिनमें सबसे ज्‍यादा ढाई हज़ार बाघ भारत में हैं. इनके अस्तित्व पर लगातार खतरा मंडरा रहा है और यह प्रजाति विलुप्त होने की स्थिति में है. जंगलों के कटान और अवैध शिकार के कारण बाघों की संख्या तेज़ी से कम हो रही है. 'वर्ल्ड वाइल्ड लाइफ फंड' और 'ग्लोबल टाइगर फोरम' के 2016 के आंकड़ों के मुताबिक, पूरी दुनिया में लगभग 6000 बाघ ही बचे हैं, जिनमें से 3891 बाघ भारत में हैं.

वर्ष 2010 में रूस के सेंट पीटर्सबर्ग में हुए बाघ सम्मेलन में 29 जुलाई को अंतर्राष्ट्रीय बाघ दिवस मनाने का निर्णय लिया. इस सम्मेलन में 13 देशों ने भाग लिया था और उन्होंने 2022 तक बाघों की संख्या में दोगुनी बढ़ोत्तरी का लक्ष्य रखा था. बाघ जंगल के स्वास्थ्य एवं शाकाहारी वन्य प्राणियों की उपलब्धता दर्शाते हैं. जहां जंगल अच्छा होगा, वहां बाघ होगा. भोजन शृंखला के व्यवहार पर बाघ और जंगल की स्थिति का पता चलता है. इनके संरक्षण के लिए कई देश मुहिम चला रहे हैं, लेकिन फिर भी पर्यावरणविदों का मानना है कि यदि इनकी संख्या घटने की रफ्तार ऐसी ही रही तो आने वाले एक-दो दशक में बाघ का नामो निशान इस धरती से मिट जाएगा. आप और हम, जिस बाघ को देखकर डर जाते हैं और उनकी गरज सुनकर अच्छे-अच्छे कांप जाते हैं, आज उनके खुद के अस्तित्व पर खतरा मंडरा रहा है.

भारत का राष्ट्रीय पशु
बाघ को भारत का राष्ट्रीय पशु कहा जाता है. बाघ देश की शक्ति, शान, सतर्कता, बुद्धि और धीरज का प्रतीक है. बाघ भारतीय उपमहाद्वीप का प्रतीक है और उत्तर-पश्चिमी क्षेत्र को छोड़कर पूरे देश में पाया जाता है. शुष्क खुले जंगल, नम-सदाबहार वन से लेकर मैंग्रोव दलदलों तक इसका क्षेत्र फैला हुआ है. लेकिन राष्ट्रीय पशु बाघ को आईयूसीएन ने लुप्त होती प्रजाती की लिस्ट में रखा हुआ है. वनों में शिकार और जरुरी संसाधनों में की कमी के कारण देश में बाघों की संख्या में गंभीर गिरावट आई है. रॉयल बंगाल टाइगर को राष्ट्रीय पशु घोषित किए जाने के बाद 1972 में 'भारतीय वन्यजीव संरक्षण अधिनियम' को लागू किया गया. इस वन्यजीव संरक्षण अधिनियम के तहत सरकारी एजेंसियां बंगाल बाघों के संरक्षण के लिए कोई भी सख्त कदम उठा सकती है.

भारत में रॉयल बंगाल टाइगर्स की व्यवहार्यता को बनाए रखने और उनकी संख्या में वृद्धि करने के उद्देश्य से 1973 में 'प्रोजेक्ट टाइगर लॉन्च' किया गया था. मौजूदा समय में भारत में 48 बाघ उद्यान हैं, जिनमें से कई जीआईएस प्रणाली का इस्तेमाल कर बाघों की संख्या में वृद्धि करने में सफल रहे हैं. इन उद्यानों में बाघों के शिकार को लेकर काफी सख्त नियम बनाये गए हैं. साथ ही इसके लिए एक समर्पित टास्क फोर्स की भी स्थापना की गई है. 

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