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03 August 2018

अमेरिकी संसद में राष्ट्रीय रक्षा प्राधिकार विधेयक 2019 पारित, रूस से हथियार खरीदने पर नहीं लगेगा अमेरिकी प्रतिबंध,

अमेरिकी संसद ने रूस से रक्षा सौदा करने पर भारत को प्रतिबंध से बचाने का रास्ता निकाल लिया है. संसद ने राष्ट्रीय रक्षा प्राधिकार विधेयक, 2019 पारित कर सीएएटीएस कानून के तहत भारत पर प्रतिबंध लगने की आशंका को खत्म कर दिया है. 'प्रतिबंधों के जरिये अमेरिका के विरोधियों के खिलाफ कार्रवाई कानून' (सीएएटीएसए) के तहत रूस से महत्वपूर्ण रक्षा उपकरण खरीदने वाले देशों पर प्रतिबंध लगा दिया जाता है.  साथ ही इस विधेयक में पाकिस्तान को मिलने वाली सहायता राशि घटाकर 15 करोड़ डॉलर कर दी गयी है. यह पिछले वर्ष मंजूर 70 करोड़ डॉलर के मुकाबले काफी कम है. सीनेट ने 2019 वित्त वर्ष के लिए नेशनल डिफेंस ऑथराइजेशन एक्ट (एनडीएए) को 10 मतों के मुकाबले 87 मतों से पारित कर दिया. प्रतिनिधि सभा में यह विधेयक पिछले सप्ताह ही पारित हो चुका है. अब यह कानून बनने के लिए राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के पास जाएगा. उनके हस्ताक्षर के बाद यह कानून लागू हो जाएगा. 

इस विधेयक में सीएएटीएसए के प्रावधान 231 को समाप्त करने की बात कही गई है. सीएएटीएसए के संशोधित प्रावधानों को कानूनी रूप मिलने के बाद भारत के लिए रूस से एस-400 मिसाइल रक्षा प्रणाली खरीदना आसान हो जाएगा. रूस से रक्षा खरीद करने वाले देशों के खिलाफ प्रतिबंध लगाने वाले प्रावधानों का बेहद नरम कर दिया गया है. रक्षा विधेयक में ऐसा प्रावधान किया गया है, जिसके तहत अमेरिका और अमेरिकी रक्षा संबंधों के लिए महत्वपूर्ण साझेदार को राष्ट्रपति एक प्रमाणपत्र जारी कर प्रतिबंधों से छूट दे सकते हैं. अमेरिकी संसद ने 71,600 करोड़ डॉलर (लगभग 49 लाख करोड़ रुपये) का रक्षा विधेयक पारित किया है, जिसमें भारत के साथ रक्षा भागीदारी मजबूत करने की बात कही गई है. ओबामा प्रशासन ने भारत को 2016 में अमेरिका के अहम रक्षा साझेदार का दर्जा दिया था. प्रतिनिधि सभा और सीनेट ने संयुक्त रिपोर्ट में कहा कि अमेरिका को भारत के साथ अपनी रक्षा साझेदारी मजबूत करनी चाहिए. 

कांग्रेस के दोनों सदनों में पारित विधेयक में हिंद महासागर क्षेत्र और पश्चिम प्रशांत महासागर में भारत के साथ अतिरिक्त संयुक्त अभ्यास करने तथा सुरक्षा और स्थिरता को बढ़ावा देने के लिए सहयोग बढ़ाने का प्रावधान है. विधेयक के अनुसार, कांग्रेस का मानना है कि अमेरिका को जापान, भारत, ऑस्ट्रेलिया और अन्य सहयोगियों तथा साझेदारों के साथ मिलकर मुक्त और खुले हिंद-प्रशांत क्षेत्र के मूल्य बरकरार रखने की दिशा में काम करना चाहिए तथा क्षेत्रीय सुरक्षा और स्थिरता कायम करनी चाहिए. इस विधेयक में चीन को दुनिया के सबसे बड़े अंतरराष्ट्रीय नौवहन युद्धाभ्यास रिम ऑफ द पैसिफिक एक्सरसाइज (आरआईएमपीएसी) में भाग लेने से रोकने तथा उसकी कंपनियों को रक्षा तथा सुरक्षा प्रतिष्ठानों के लिए कुछ दूरसंचार उपकरण मुहैया कराने से रोकने का प्रावधान भी है.

15 साल में अमेरिका से 208461 करोड़ की मदद ले चुका है पाकिस्तान
वैश्विक विकास केंद्र (सेंटर फॉर ग्लोबल डवलवमेंट) की रिपोर्ट में दावा किया गया है कि कि 1951 से लेकर 2011 तक अलग-अलग मदों में अमेरिका ने पाकिस्तान को 67 बिलियन अमेरिकी डॉलर की मदद दी है. पिछले साल ही अमेरिका ने पाकिस्तान को दी जाने वाली 255 मिलियन डॉलर की सैन्य मदद पर रोक लगा दी थी. ट्रंप ने कहा है कि अमेरिका पिछले 15 सालों में पाकिस्तान को 33 अरब डॉलर से ज्यादा की सहायता दे चुका है, यानी आतंकवाद पर लगाम लगाने के लिए पाकिस्तान को पिछले डेढ़ दशक में अमेरिका से 2 लाख 8 हजार 461 करोड़ रुपये की मदद मिल चुकी है. यूं तो भारत विभाजन के बाद अस्तित्व में आए पाकिस्तान को उसके गठन से ही अमेरिका मदद देता आ रहा है. लेकिन 2001 में अमेरिका पर आतंकी हमले के बाद यूएस ने पाकिस्तान को मदद का भंडार खोल दिया. अमेरिका के एक रिसर्च थिंक टैंक की रिपोर्ट में बताया गया है कि 1951 से लेकर 2011 तक अलग-अलग मदों में अमेरिका ने पाकिस्तान को 67 बिलियन अमेरिकी डॉलर की मदद दी है.

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