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13 August 2018

भारतीय मूल के नोबेल पुरस्कार प्राप्त लेखक वीएस नायपॉल का निधन

 समकालीन दौर में विश्व के महानतम उपन्यासकारों में शामिल सर विद्याधर सूरज प्रसाद नायपॉल का निधन हो गया है. शनिवार को 85 वर्ष की आयु में अपने लंदन स्थित आवास पर उन्होंने अंतिम सांस ली. प्रशंसकों के बीच 'सर विदिया' के नाम से मशहूर नायपॉल ने उपनिवेशवाद, आदर्शवाद, धर्म और राजनीति जैसे विषयों पर हमेशा मुखर होकर लिखा. उनको वर्ष 2001 में साहित्य के लिए नोबेल पुरस्कार से सम्मानित किया गया. वे रवींद्रनाथ टैगोर के बाद साहित्य का नोबेल हासिल करने वाले भारतीय अथवा भारतीय मूल के सिर्फ दूसरे लेखक थे. वर्ष 1961
में प्रकाशित 'अ हाउस फॉर मिस्टर बिस्वास' उनकी सबसे मशहूर एवं लोकप्रिय किताब है. इस उपन्यास से सिर्फ 31 वर्ष की उम्र में नायपॉल पूरी दुनिया में मशहूर हो गए. उनको 'मास्टर ऑफ इंग्लिश' भी कहा जाता है.

बता दें कि वीएस नायपॉल का पूरा नाम विद्याधर सूरज प्रसाद नायपॉल था. विद्याधर सूरजप्रसाद नायपॉल का जन्म 17 अगस्त, 1932 में त्रिनिदाद में एक भारतीय हिंदू परिवार में हुआ था. उनका बचपन बेहद गरीबी और अभाव में बीता. 18 साल का होने पर वह छात्रवृत्ति हासिल कर ऑक्सफोर्ड में पढ़ने के लिए चले आए. जीवन के संघर्षो ने यहां भी उनका साथ नहीं छोड़ा. इसी दौरान वे अपनी सहपाठी पैट्रीशिया एन हेल के करीब आए. पैट्रीशिया के कहने पर उन्होंने कहानियां लिखना शुरू किया. 1955 में परिजनों के विरोध के बावजूद वे दोनों शादी के बंधन में बंध गए. इसके बाद वह इंग्लैंड में बस गए. 1996 में पैट्रीशिया का निधन हो गया और उसी वर्ष उन्होंने पाकिस्तानी पत्रकार नादिरा अल्वी से शादी कर ली.

लेखन की दुनिया में उन्होंने काफी शोहरत हासिल की. नायपॉल विश्व साहित्य के आकाश में सूर्य की तरह उगे और अगले कई दशकों तक चमकते रहे. उन्होंने अपने जीवन में कथा और कथेतर विधा में 30 से अधिक किताबें लिखीं. 'द मिस्टिक मैसूर' उनका पहला उपन्यास था। इसका प्रकाशन 1955 में हुआ था. इसके अलावा 'द मिमिक मेन' (1967), 'इन ए फ्री स्टेट' (1971), 'गुरिल्लाज' (1975), 'ए बेंड इन द रिवर' (1979), 'ए वे इन व‌र्ल्ड' (1994), 'द इनिग्मा ऑफ अराइवल' (1987), 'बियॉन्ड बिलिफ : इस्लामिक एक्सकर्जन अमंग द कन्वर्टेड पीपुल्स' (1998), 'हाफ ए लाइफ' (2001), 'द राइटर एंड द व‌र्ल्ड' (2002), 'लिटरेरी ऑकेजन्स (2003), 'द नॉवेल मैजिक सीड्स' (2004) आदि उनकी मशहूर रचनाओं में शामिल हैं. नायपॉल को उनकी जबरदस्त लेखनी के लिए साहित्य के क्षेत्र में कई प्रतिष्ठित पुरस्कारों से सम्मानित किया गया, जिनमें वर्ष 1971 में मिला 'मैन बुकर प्राइज' और वर्ष 1990 में मिला 'नाइटहुड' शामिल है. इसके साथ ही 2001 में उनको साहित्य के क्षेत्र में नोबेल पुरस्कार दिया गया था.

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