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13 September 2018

अप्सरा’ परमाणु रिएक्टर 09 वर्ष बाद पुनः आरंभ किया गया

देश के सबसे पुराने शोध रिएक्टर 'अप्सरा' को अधिक क्षमता के साथ फिर से शुरू किया गया है. इस रिएक्टर को मरम्मत के लिए 2009 में स्थायी तौर पर बंद कर दिया गया था. भाभा एटामिक रिसर्च सेंटर (बार्क) ने मंगलवार को बयान जारी कर बताया कि रिएक्टर को और उन्नत बनाने के बाद 10 सितंबर को फिर से शुरू किया गया है. इस रिएक्टर को सर्वप्रथम अगस्त 1958 में शुरू किया गया था. अब तक इस शोध रिएक्टर का इस्तेमाल न्यूट्रॉन की गतिविधियों के विश्लेषण, विकिरण से होने वाले नुकसान के अध्ययन, फोरेंसिक शोध, न्यूट्रॉन रेडियोग्राफी में किया गया है. 

रिएक्टर के अस्तित्व में आने के 62 साल बाद इसे उच्च क्षमता के साथ एक स्वीमिंग पूल प्रकार के शोध रिएक्टर की तरह अपग्रेड किया गया है. इसमें देश में ही निर्मित यूरेनियम से बनी प्लेटों का प्रयोग किया गया है, जिससे बहुत कम उत्सर्जन होगा. उन्नत रिएक्टर चिकित्सा उपयोग के लिए रेडियो आइसोटोप के स्वेदशी उत्पादन में वृद्धि करेगा. उच्च न्यूट्रॉन प्रवाह के आधार पर, यह रिएक्टर चिकित्सा उपयोग में कम से कम 50 फीसद रेडियो आइसोटोप के उत्पादन में वृद्धि करेगा. वहीं इसका उपयोग न्यूक्लियर फिजिक्स, मैटीरियल साइंस और रेडिएशन से बचाव में भी किया जा सकेगा.

अप्सरा रिएक्टर के इस मॉडल को ‘अप्सरा-अपग्रेडेड’ (अप्सरा-यू) के नाम से जाना जायेगा. भारत के परमाणु कार्यक्रम के जनक डॉ होमी जे भाभा के अनुसार, “अनुसंधान रिएक्टर देश के परमाणु कार्यक्रम की रीढ़ होते हैं.” इसी बात का महत्व समझते हुए अप्सरा रिएक्टर को ट्रोमबे कैंपस में अगस्त 1956 में आरंभ किया गया था. अप्सरा एक हल्के स्विमिंग पूल जैसा रिएक्टर है जिसकी अधिकतम क्षमता एक मेगावाट थर्मल है. यह रिएक्टर एल्यूमीनियम मिश्रित प्लेटों के रूप में समृद्ध यूरेनियम को प्रयोग करता है. लगभग 54 वर्षों की सेवा के बाद इसे 2009 में बंद कर दिया गया था.

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