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07 September 2018

भारत और अमेरिका के बीच पहली बार 2+2 वार्ता का आयोजन

भारत और अमेरिका ने 06 सितम्बर 2018 को नई दिल्ली में पहली बार टू प्लस टू (2+2) वार्ता का आयोजन किया. जिसमें विदेश मंत्री सुषमा स्‍वराज और रक्षा मंत्री निर्मला सीतारमण ने अपने अमेरिकी समकक्षों माइक पोंपेयो और जिम मैटीस से मुलाकात की। इस वार्ता के दौरान दोनों देशों ने भारत-प्रशांत क्षेत्र में आपसी सहयोग को बढ़ाने और डिफेंस टेक्‍नोलॉजी से जुड़े एक सौदो को अंतिम रूप देने पर चर्चा की. अमेरिका विदेश मंत्री माइक पोंपेयो और रक्षा मंत्री जिम मैटीस बुधवार को वार्ता के लिए भारत पहुंचे हैं. विदेश मंत्री सुषमा स्‍वराज ने जहां पोंपेयो को स्‍वागत किया तो वहीं सीतारमण ने जिम मैटीस का स्‍वागत किया. गुरुवार को जवाहर लाल नेहरू भवन में वार्ता का आयोजन हुआ और वार्ता के बाद मंत्रियों की तरफ से एक ज्‍वॉइन्‍ट स्‍टेटमेंट भी जारी किया गया. अमेरिका के ज्‍वॉइन्‍ट चीफ्स ऑफ स्‍टाफ जनरल जोसेफ ड्यूनफोर्ड भी इस डेलीगेशन में शामिल हैं. इस वार्ता से अलग सीतारमण ने मैटीस और सुषमा स्‍वराज ने पोंपेयो से अलग मुलाकात भी की.

विदेश मंत्री सुषमा स्‍वराज ने वार्ता के बाद जानकारी दी कि भारत और अमेरिका दोनों ही न्‍यूक्लियर सप्‍लायर ग्रुप (एनएसजी) में भारत की एंट्री के लिए साथ मिलकर काम करने को राजी हुए हैं. वहीं इस वार्ता के दौरान कॉमकासा यानी कम्‍यूनिकेशंस कॉम्‍पैटि‍बिलिटी एंड सिक्‍योरिटी एग्रीमेंट भी साइन किया है. इस एग्रीमेंट के साइन होते ही भारत के लिए अमेरिकी की तरफ से संवेदनशील मिलिट्री टेक्‍नोलॉजी और उपकरणों की खरीद का रास्‍ता साफ हो गया है. पोंपेयो ने कॉमकासा को दोनों देशों के रिश्‍तों में एक मील का पत्‍थर करार दिया. वहीं रक्षा मंत्री सीतारमण ने कहा कि इस एग्रीमेंट के बाद भारत की रक्षा क्षमताओं और तैयारियों में इजाफा होगा. 

सीतारमण ने बताया कि वार्ता में रक्षा मुद्दा सबसे अहम मुद्दा बनकर उभरा. सीतारमण के मुताबिक भारत और अमेरिका दोनों ही देश साझा लोकतांत्रिक मूल्‍यों की रक्षा के लिए प्रतिबद्ध हैं. दोनों ही देश शांति और नागरिकों की समदृता के लिए काम करने पर राजी हुए हैं. विदेश मंत्री सुषमा स्‍वराज ने कहा कि भारत, अमेरिकी राष्‍ट्रपति डोनाल्‍ड ट्रंप की अफगानिस्‍तान नीति का स्‍वागत करता है. दोनों देश साथ‍ मिलकर आतंकवाद के खिलाफ लड़ाई जारी रखने के लिए प्रतिबद्ध हैं. अमेरिकी रक्षा मंत्री जिम मैटीस ने वार्ता के बाद कहा कि भारत और अमेरिका साथ मिलकर काम करते रहेंगे और साथ ही उन्‍होंने एक बार फिर से भारत को अमेरिका का सबसे बड़ी रक्षा साझीदार करार दिया. दिल्‍ली पहुंचने से पहले अमेरिकी विदेश मंत्री पोंपेयो ने साफ कर दिया था कि भारत और रूस के बीच हुई डिफेंस डील और ईरान के साथ ऊर्जा करार वार्ता का प्राथमिक मुद्दा नहीं होंगे.

क्या है 2+2 वार्ता?
जब दो देश दो-दो मंत्रिस्तरीय वार्ता में शामिल होते हैं तो इसे विदेश नीति के संबंध में 2+2 वार्ता कहा जाता है. सामान्य तौर पर 2+2 वार्ता में दोनों देशों की तरफ से उनके विदेश और रक्षा मंत्री हिस्सा लेते हैं. वर्ष 2010 में भारत और जापान के बीच भी इस तरह की वार्ता हो चुकी है. अमेरिका ने दो बार इस मीटिंग को टाल चुका है. ये मीटिंग पहले अप्रैल में होनी थी, फिर जून में और अब आखिरकार ये 6 सितंबर को होने वाली है. दोनों ही बार मीटिंग टालने के कोई स्पष्ट कारण नहीं बताए गए थे. ये मीटिंग अबसे प्रत्येक साल होगी. दोनों देश बारी-बारी से इसकी मेजबानी करेंगे. यह मीटिंग न सिर्फ सांकेतिक रूप से दोनों ही देशों के बहुत महत्वपूर्ण है, बल्कि इसके जरिए दोनों ही देश अपने मनमुटाव दूर करने की कोशिश करेंगे.

एशिया-प्रशांत में चीन का दबदबा बढ़ रहा है. चीन और अमेरिका के संबंध कड़वे हैं. ऐसे में अमेरिका को चीन का मुकाबला करने हेतु भारत से ज्यादा सक्षम देश कोई और नजर नहीं आता. इसलिए अमेरिका भारत को अपनी ओर करना चाहता है. ऐसे में ये मीटिंग दोनों देशों के लिए अपने-अपने हितों को जाहिर करना और सामने वाले की स्थिति भांपने के लिए काफी अहम है.

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