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15 September 2018

जस्टिस रंजन गोगोई सुप्रीम कोर्ट के 46वें मुख्य न्यायाधीश नियुक्त

राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद ने देश के अगले प्रधान न्यायाधीश के तौर पर 13 सितंबर 2018 को जस्टिस रंजन गोगोई के नाम को मंजूरी प्रदान की. जस्टिस रंजन गोगोई भारत के 46वें मुख्य न्यायाधीश होंगे. कानून मंत्रालय ने यह जानकारी दी. मौजूदा मुख्य न्यायाधीश दीपक मिश्रा के रिटायर होने के बाद तीन अक्टूबर को रंजन गोगोई अपना पदभार ग्रहण करेंगे. जस्टिस गोगोई का 13 महीने से थोड़ी अधिक अवधि का कार्यकाल होगा और वह 17 नवंबर, 2019 को सेवानिवृत होंगे. राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद ने जस्टिस गोगोई की नियुक्ति संबंधी वारंट पर हस्ताक्षर किया, जिसके बाद उनकी नियुक्ति की अधिसूचना जारी की गई. जस्टिस मिश्रा ने मुख्य न्यायाधीश के बाद के वरिष्ठतम जज के नाम की सिफारिश करने की परंपरा के अनुसार इस महीने के शुरुआत में जस्टिस गोगोई के नाम की सिफारिश अपने उत्तराधिकारी के तौर पर की थी. 

देश के अगले मुख्य न्यायाधीश बनने जा रहे जस्टिस रंजन गोगोई ने न्यायपालिका के शीर्ष पद तक पहुंचने के लिए एक लंबा सफर तय किया है और वह इस पद पर पहुंचने वाले पूर्वोत्तर के पहले शख्स हैं. 18 नवंबर, 1954 को जन्मे न्यायमूर्ति रंजन गोगोई ने डिब्रूगढ़ के डॉन बॉस्को स्कूल से अपनी शुरुआती पढ़ाई की और दिल्ली विश्वविद्यालय के सेंट स्टीफेंस कॉलेज से इतिहास की पढ़ाई की. असम के पूर्व मुख्यमंत्री केशव चंद्र गोगोई के बेटे न्यायमूर्ति रंजन गोगोई ने 1978 में वकालत के लिए पंजीकरण कराया था. उन्होंने संवैधानिक, कराधान और कंपनी मामलों में गुवाहाटी उच्च न्यायालय में वकालत की. उन्हें 28 फरवरी, 2001 को गुवाहाटी उच्च न्यायालय का स्थायी न्यायाधीश नियुक्त किया गया था. गोगोई को नौ सितंबर, 2010 को पंजाब एवं हरियाणा उच्च न्यायालय में तबादला किया गया. उन्हें 12 फरवरी, 2011 को पंजाब एवं हरियाणा उच्च न्यायालय का मुख्य न्यायाधीश नियुक्त किया गया था. वह 23 अप्रैल, 2012 को उच्चतम न्यायालय के न्यायाधीश नियुक्त किए गए.

जस्टिस रंजन गोगोई (63) जनवरी में सुप्रीम कोर्ट के तीन अन्य वरिष्ठतम न्यायाधीशों के साथ संवाददाता सम्मेलन कर तथा उसके चार महीने बाद अपने एक बयान से सुर्खियों में आए थे. उन्होंने कहा था, ‘स्वतंत्र न्यायाधीश और शोर मचाने वाले पत्रकार लोकतंत्र की पहली रक्षा रेखा हैं.’ उनका यह भी कहना था कि न्यायपालिका के संस्थान को आम लोगों के लिए सेवा योग्य बनाए रखने के लिए सुधार नहीं क्रांति की जरुरत है. जस्टिस रंजन गोगोई तीन अक्टूबर को 46 वें प्रधान न्यायाधीश के तौर पर पदभार ग्रहण करेंगे. वह 17 नवंबर, 2019 को सेवानिवृत होंगे. उन्होंने असम की राष्ट्रीय नागरिक रजिस्टर, सांसदों और विधायकों की विशेष तौर पर सुनवाई के लिए विशेष अदालतों के गठन, राजीव गांधी हत्याकांड के मुजरिमों की उम्रकैद की सजा में कमी, लोकपाल की नियुक्ति समेत विभिन्न विषयों पर अहम फैसले दिये हैं.

मुख्य न्यायाधीश की नियुक्ति: भारत के मुख्य न्यायाधीश की नियुक्ति भारत के राष्ट्रपति द्वारा भारतीय संविधान के अधिनियम संख्या 124 के दूसरे सेक्शन के अंतर्गत होती है. ये पद भारतीय गणतंत्र का सबसे ऊंचा न्यायिक पद होता है. सर्वोच्च न्यायालय के भावी चीफ जस्टिस को तात्कालिक समय में सुप्रीम कोर्ट के सीनियर जजों में होना अनिवार्य है. पुराने चीफ जस्टिस के सेवा निवृत और नये मुख्य न्यायाधीश की नियुक्ति के समय भारत के क़ानून मंत्री तथा जस्टिस और कंपनी अफेयर्स का उपस्थित होना आवश्यक है. मुख्य न्यायाधीश के जज के चयन के बाद जस्टिस अफेयर्स और कानून मंत्री सारा ब्यौरा भारत के तात्कालिक प्रधानमन्त्री के हाथ सौंपते हैं. भारत के प्रधानमंत्री उन ब्योरों के मद्देनज़र देश के राष्ट्रपति को चीफ जस्टिस की नियुक्ति के मामले में अपनी राय देते हैं. भारत के सर्वोच्च न्यायालय में मुख्य न्यायाधीश के अतिरिक्त 30 अन्य न्यायधीश और मौजूद होते हैं.

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