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17 September 2018

इसरो ने दो ब्रिटिश उपग्रहों को सफलतापूर्वक प्रक्षेपित किया

भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो) ने 16 सितंबर 2018 को श्रीहरिकोटा से अपने ध्रुवीय उपग्रह प्रक्षेपण यान - पी.एस.एल.वी- सी42 को सफलतापूर्वक प्रक्षेपित किया. श्रीहरिकोटा के सतीश धवन अंतरिक्ष केन्द्र के प्रथम प्रक्षेपण स्थल से इसरो ने इसके जरिए दो विदेशी सैटेलाइट्स को अंतरिक्ष में पहुंचाया. इसमें नोवासार और एस 1-4 शामिल हैं. दोनों उपग्रहों को लेकर पीएसएलवी-सी42 अंतरिक्ष यान रात 10:08 बजे सतीश धवन अंतरिक्ष केंद्र के प्रथम लांचपैड से रवाना हुआ. पीएसएलवी ने उपग्रहों को प्रक्षेपण के 17 मिनट 45 सेकंड बाद कक्षा में स्थापित कर दिया.

इन उपग्रहों का वजन 800 किलोग्राम है. यह दोनों उपग्रह ब्रिटेन की सर्रे सेटेलाइट टेक्नोलॉजी लिमिटेड के हैं. यह इस वर्ष का पहला व्यवसायिक मिशन है. एंटरिक्स कॉरपोरेशन व्यवसायिक स्तर पर 280 से अधिक विदेशी उपग्रह अंतरिक्ष में भेज चुका है. पीएसएलवी इसरो का एक मात्र ऐसा विश्वसनीय यान है जो 12वीं बार छोड़ा गया. इसके साथ ही भारत उन देशों की श्रेणी में शामिल हो गया, जिसके पास विदेशी उपग्रहों को अंतरिक्ष में स्थापित करने या भेजने की अपनी तकनीक और क्षमता मौजूद है.

नोवाएसएआर का इस्तेमाल वन्य मानचित्रण, भू उपयोग और बर्फ की तह की निगरानी, बाढ़ और आपदा निगरानी के लिए किया जाना है. एस 1-4 का उपयोग संसाधनों के सर्वेक्षण, पर्यावरण निगरानी, शहरी प्रबंधन तथा आपदा निगरानी के लिए किया जाएगा. करीब छह महीने पहले ही इसरो ने आईएनआरएसएस-1आई नौवहन उपग्रह को सफलतापूर्वक कक्षा में स्थापित किया था. बता दें कि ये विदेशी उपग्रह जंगलों की मैपिंग और बाढ़ और आपदा निगरानी और अन्य कार्यों के लिए हैं.

इन्हें 583 किमी की ऊंचाई पर सूर्य की तुल्यकालिक कक्षा में छोड़ा जाएगा. इन्हें सरे सैटेलाइट टेक्नोलॉजीज़ लिमिटेड, ब्रिटेन ने विकसित किया है. यह मिशन कंपनी और इसरो की वाणिज्यिक शाखा एंट्रिक्स कॉर्पोरेशन लिमिटेड के बीच एक वाणिज्यिक व्यवस्था है. यह पीएसएलवी की 44वीं उड़ान होगी और इस साल इसरो द्वारा तीसरा प्रक्षेपण होगा.

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