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13 September 2018

रेल मंत्रालय ने 'रेल सहयोग' पोर्टल लॉन्च किया

केंद्रीय रेल मंत्री पीयूष गोयल ने 11 सितम्बर 2018 को स्टेशनों पर सुविधाएं बढ़ाने के लिए कॉर्पोरेट सेक्टरों से सहयोग लेने के लिए एक वेब पोर्टल लॉन्च किया. इसके माध्यम से निजी और सार्वजनिक कंपनियां रेलवे स्टेशन पर सुविधाएं बढ़ाने के लिए कॉरपोरेट सामाजिक जिम्‍मेदारी (सीएसआर) में फंड दे सकेंगे. रेल मंत्री पीयूष गोयल ने कहा- जो कंपनियां मदद करना चाहती हैं, वे 'रेल सहयोग' पोर्टल के माध्यम से अनुरोध कर सकती हैं. कंपनी जिस क्षेत्र में मदद करना चाहती है, उसे भी चुन सकती है. यह वेब पोर्टल सीएसआर (कॉरपोरेट सामाजिक दायित्‍व) कोष के जरिए रेलवे स्‍टेशनों पर एवं इनके निकट सुविधाओं के सृजन में योगदान के लिए एक प्‍लेटफॉर्म सुलभ कराएगा.

इस पोर्टल की अनोखी खूबी इसकी सादगी और पारदर्शिता है. यह पोर्टल उद्योग जगत/कंपनियों/संगठनों को रेलवे के साथ सहयोग करने का उत्तम अवसर प्रदान करेगा. यह पोर्टल न केवल यात्रियों के लिए, बल्कि रेलवे के आसपास के क्षेत्रों के लिए भी लाभदायक साबित होगा. रेलवे 'रेल सहयोग' नामक एक अलग पोर्टल के माध्यम से निजी कंपनियों को स्टेशन परिसर में यात्रियों के लिए सुविधाएं मुहैया कराने के वास्ते अपना सीएसआर कोष से धन देने के लिए आमंत्रित करेगा. रेल सहयोग के माध्यम से कारोबारी समूह भारत के रेलवे स्टेशनों पर अलग-अलग जन सुविधाओं के लिए अपना योगदान दे सकेंगे. कारोबारी समूह एवं सरकारी कंपनियां रेल यात्रियों के लिए पानी, शौचालय, विश्राम गृह, बैठने की सुविधाएं, वेटिंग रूम, प्रकाश व्यवस्था सहित तमाम सुविधाओं के लिए पैसा लगा सकेंगे.

सभी स्टेशनों पर शौचालयों का निर्माण और वहां कंडोम वेंडिंग मशीन लगाना, कम लागत वाले सैनिटरी पैड वेंडिंग मशीन, हॉटस्पॉट लगाकर स्टेशनों पर मुफ्त वाईफाई सेवा देना तथा एक साल के लिए इनके आरंभिक रखरखाव की व्‍यवस्‍था होगी. पर्यावरणीय की दृष्टि से 2175 प्रमुख स्टेशनों पर बोतल क्रशिंग मशीनों की स्थापना भी एक और गतिविधि है. रेलवे यात्रियों द्वारा छोड़ी गई खाली प्लास्टिक की बोतलों को प्लास्टिक प्रदूषण का प्रबंधन करने के लिए इन मशीनों में कुचल दिया जाएगा. इसकी लागत लगभग 3.5 लाख से 4.5 लाख रुपये है.

इसमें योगदान के लिए इच्‍छुक कंपनियां अपने अनुरोधों के पंजीकरण के जरिए इस पोर्टल पर अपनी इच्‍छा जाहिर कर सकती हैं. इन अनुरोधों की प्रोसेसिंग रेलवे के अधिकारीगण करेंगे. ‘पहले आओ, पहले पाओ’ के सिद्धांत के आधार पर इन अनुरोधों की छटनी की जाएगी और चयनित आवेदकों को रेलवे या नामित एजेंसियों जैसे कि राइट्स/रेलटेल इत्‍यादि के यहां संबंधित धनराशि जमा करने के बारे में सूचित कर दिया जाएगा. इसके बाद नामित एजेंसी संबंधित कार्य को पूरा करेगी.

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