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12 September 2018

स्वास्थ्य मंत्रालय ने एचआईवी/एड्स अधिनियम की अधिसूचना जारी की

केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय की ओर से एचआईवी/एड्स अधिनियम, 2017 की अधिसूचना जारी कर दी गई है. अधिसूचना में बताया गया है कि 10 सितंबर 2018 से इसे पूरे देश में लागू कर दिया गया है. एचआईवी-एड्स पीड़ित मरीजों के साथ भेदभाव करने पर अब सजा मिलेगी और जुर्माना भी भरना पड़ सकता है. ऐसा करने पर तीन महीने से लेकर दो साल तक की सजा हो सकती है. इसके अलावा एक लाख रुपये तक जुर्माने का भी प्रावधान है. 2014 में कैबिनेट से मंजूर हुआ यह बिल पिछले साल अप्रैल में ही संसद में पारित हो चुका था. लेकिन इसकी अधिसूचना जारी नहीं की गई थी. अधिसूचना जारी करने में हो रही देरी को लेकर पिछले महीने दिल्ली हाईकोर्ट ने स्वास्थ्य मंत्रालय को फटकार लगाई थी.
 
एचआईवी और एड्स अधिनियम 2017 को राज्यसभा ने पिछले साल 21 मार्च को जबकि लोकसभा ने 11 अप्रैल को मंजूरी दे दी थी. इस कानून के मुताबिक एचआईवी-एड्स पीड़ितों का मुफ्त इलाज करना अनिवार्य होगा. एचआईवी-एड्स मरीजों के साथ नौकरी, शैक्षणिक संस्थानों, स्वास्थ्य क्षेत्र, किराये पर मकान देने, निजी और सरकारी कार्यालय, स्वास्थ्य के क्षेत्र के इंश्योरेंस में यदि किसी तरह का भेदभाव किया गया तो उनके खिलाफ सजा और जुर्माने का प्रावधान है. एचआईवी-एड्स मरीजों को संपत्ति का अधिकार होगा और 18 वर्ष से कम उम्र के मरीजों को अपने घर में रहने का समान अधिकार होगा. नौकरी पाने और शैक्षणिक संस्थानों में मरीज को अपनी बीमारी के बारे में बताना अनिवार्य नहीं होगा और यदि मरीज जानकारी देता भी है तो उसके नाम को सार्वजनिक करने पर सजा और जुर्माना के प्रावधान है. 

कानून के प्रावधानों के मुताबिक राज्यों में कानून का उल्लंघन ने हो इसके लिए हर राज्य में एक-एक लोकपाल नियुक्त किए जाएंगे. इसके अलावा उन सभी संस्थानों में जहां 100 या इससे अधिक कर्मचारी काम कर रहे हैं, वहां ऐसे मरीजों की शिकायत सुनने के लिए एक शिकायत अधिकारी नियुक्त करने का प्रावधान किया गया है. एचआईवी-एड्स की रोकथाम के क्षेत्र में काम कर रही संस्था नाको के आंकड़ों के मुताबिक एचआईवी-एड्स के मरीजों की संख्या में पिछले कुछ सालों के दौरान कमी आई है. बावजूद इसके नाको के साल 2011 के आकड़ों के मुताबिक देश में करीब 21 लाख लोग एचआईवी और एड्स से पीड़ित हैं.

यूएनएड्स (UNAIDS की रिपोर्ट के अनुसार, भारत में वर्ष 2015 तक लगभग 20 लाख लोग एचआईवी पीड़ित थे. वर्ष 2015 में 68,000 से ज्यादा एड्स से संबंधित मौतें हुई थीं, वहीं 86,000 नए लोगों में एचआईवी इन्फेक्शन के लक्षण पाए गए थे. अब तक यह संख्या लाखों में हो गई होगी. इसके साथ ही एचआईवी/एड्स पीड़ितों के साथ भेदभाव की समस्या भी भारत में मौजूद पाई गई इसलिए यह अधिनियम काफी अहम माना जा रहा है.

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