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06 September 2018

शिक्षक दिवस

भारत में 'शिक्षक दिवस' प्रत्येक वर्ष 05 सितम्बर को मनाया जाता है. शिक्षक दिवस गुरु की महत्ता बताने वाला प्रमुख दिवस है. ये दिन है, जब आप उन लोगों के प्रति अपना प्यार और सम्मान दर्शाते हैं, जिनसे आपको जीवन में कुछ खास सीखने को मिला है. ये स्कूल टीचर से लेकर, कॉलेज प्रोफेसर तक, ट्रेनर से लेकर कोच तक कोई भी किसी भी क्षेत्र का हो सकता है. इस दिन भारत के पहले उपराष्ट्रपति और दूसरे राष्ट्रपति सर्वपल्ली राधाकृष्णन का जन्मदिन होता है. उनका जन्मदिन भारत में टीचर्स डे के तौर पर ही मनाया जाता है. सर्वपल्ली राधाकृष्णन भारतीय संस्कृति के संवाहक, प्रख्यात शिक्षाविद और महान दार्शनिक थे. राजनीति में आने से पहले डॉ सर्वपल्ली राधाकृष्णन एक सम्मानित अकादमिक थे. इस दिन समस्त देश में भारत सरकार द्वारा श्रेष्ठ शिक्षकों को पुरस्कार भी प्रदान किया जाता है.

इस दिन शिक्षक दिवस बनाए जाने की कहानी यह है कि भारत का राष्ट्रपति होने के बाद उनके कुछ दोस्तों और शिष्यों ने उनसे उनका जन्मदिन मनाने की अनुमति देने के लिए कहा. इस पर उन्होंने कहा कि मेरे जन्मदिन का जश्न मनाने की बजाय, 5 सितंबर को शिक्षक दिवस के रूप में मनाया जाए तो मुझे गर्व महसूस होगा. तब से उनके जन्मदिन को भारत में शिक्षक दिवस के रूप में मनाया जाने लगा. देश में पहली बार 05 सितंबर 1962 को शिक्षक दिवस मनाया गया था. शिक्षक दिवस दुनिया भर में मनाया जाता है, लेकिन सबने इसके लिए एक अलग दिन निर्धारित किया है. कुछ देशों में छुट्टी रहती है जबकि कुछ देश इस दिन कार्य करते हुए मनाते हैं. भारत में 'शिक्षक दिवस' 05 सितंबर को मनाया जाता है, वहीं 'अन्तरराष्ट्रीय शिक्षक दिवस' का आयोजन 05 अक्टूबर को होता है. ऑस्ट्रेलिया में यह अक्टूबर के अंतिम शुक्रवार को मनाया जाता है, भूटान में दो मई को तो ब्राजील में 15 अक्टूबर को, कनाडा में पांच अक्टूबर, यूनान में 30 जनवरी, मेक्सिको में 15 मई, पराग्वे में 30 अप्रैल और श्रीलंका में छह अक्टूबर को शिक्षक दिवस मनाया जाता है. ओमान, सीरिया, मिश्र, लीबिया, कतर, बहरीन, संयुक्त अरब अमीरात, यमन, टुनिशिया, जार्डन, सउदी अरब, अल्जीरिया, मोरक्को और अन्य इस्लामी देशों में 28 फरवरी को शिक्षक दिवस के रूप में मनाया जाता है.

डा. सर्वपल्लीक राधाकृष्णन भारत के दूसरे राष्ट्रपति और एक शिक्षक थे. उनका जन्म 05 सितंबर 1888 को तमिलनाडु के तिरुतनी नामक गांव में हुआ था. वे पूरी दुनिया को ही स्कूल मानते थे. उन्होंने राजनीति में आने से पहले अपने जीवन के 40 साल अध्यापन को दिये थे. उनका कहना था कि जहां कहीं से भी कुछ सीखने को मिले उसे अपने जीवन में उतार लेना चाहिए. वे पढ़ाने से ज्यादा छात्रों के बौद्धिक विकास पर जोर देने की बात करते थे. कलकत्ता विश्वविद्यालय के अंतर्गत आने वाले जॉर्ज पंचम कॉलेज के प्रोफेसर के रूप में वर्ष 1937 से वर्ष 1941 तक कार्य किया. वर्ष 1948 में युनेस्को में भारतीय प्रतिनिधि के रूप में अपनी उपस्थिति दर्ज कराई. डॉ. राधाकृष्णन वर्ष 1949 से वर्ष 1952 तक रूस की राजधानी मास्को में भारत के राजदूत पद पर रहे. भारत रूस की मित्रता बढ़ाने में उनका भारी योगदान रहा था. उन्हें वर्ष 1954 में भारत रत्न से सम्मानित किया गया था.

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