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15 September 2018

झारखंड सरकार ने राज्य को हरा भरा रखने के लिए प्रदूषणरहित इलेक्ट्रिक कारों की सेवा आरंभ की

रघुवर सरकार ने झारखंड को हरा भरा रखने के लिए 13 सितंबर 2018 को प्रदूषणरहित इलेक्ट्रिक कार की सेवा आरंभ की. सीएम ने ऊर्जा विभाग के लिए खरीदी गई 20 इलेक्ट्रिक कारों को फ्लैग आफ किया. लोगों से भी इसे अपनाने का आग्रह किया. सीएम रघुवर दास ने खुद भी एक कार पर बैठकर इलेक्ट्रिक कार की सवारी का आनंद उठाया. सरकार का दावा है कि झारखंड को ग्रीन बनाए रखने की सरकार के स्तर से प्रयास हो रहा है. ऊर्जा विभाग ने इन कारों को अपने अधिकारियों के उपयोग के लिए खरीदा है.
सीएम ने अपने संबोधन में कहा कि आज प्रदूषण रहित पर्यावरण के लिए ऐसे उपाय और उपयोग जरूरी हैं.


इलेक्ट्रिक कार को रांची के शहरी क्षेत्र के लिए उपयुक्त माना जा रहा है. ऊर्जा विभाग ने कुल 50 कारों का ऑर्डर दे रहा है. इसके फीचर्स अच्छे हैं पर दाम थोड़ा अधिक हैं. सेडान सेटअप की यह कार है. इस समारोह में ईएसएसएल और झारखंड बिजली वितरण निगम के बीच समझौता हुआ. ऊर्जा विभाग के प्रधान सचिव ने कहा कि यह कार एक बड़े मकसद को पूरा करेगी. इसे और विभाग भी खरीद सकते हैं. केंद्र का ई-मोबिलिटी कॉन्सेप्ट के तहत देश भर में इलेक्ट्रिक विह्कल का उपयोग तेजी से करने का प्लान है. भविष्य में लगभग एक हजार कारें सरकारी विभागों के लिए खरीदी जाएंगी. जगह-जगह पर इनके लिए चार्जिंग प्वाइंट बनाने की आवश्यकता होगी. इसके लिए पेट्रोलियम मंत्रालय के साथ बातचीत होगी. अभी इन कारों को टाटा कंपनी से खरीदा गया है. अधिक संख्या में ऑर्डर पर इसकी कीमत घटने की संभावना है.


इस कार्य से झारखंड पूर्वी क्षेत्र का पांचवां राज्य बन गया है जिसने सरकारी उपयोग के लिए पर्यावरण हितैषी वाहनों का उपयोग आरंभ किया है. झारखंड से पहले दिल्ली, महाराष्ट्र, आंध्र प्रदेश एवं तेलंगाना सरकारी काम-काज के लिए इलेक्ट्रिक वाहनों का उपयोग आरंभ कर चुके हैं. पचास कारों के बेड़े के साथ आने से जेबीवीएनएल का हर साल 1.20 लाख लीटर ईंधन बचेगा और लगभग 14 सौ टन कार्बन डाईआक्साइड सालाना कम उत्सर्जित होगा. जेबीवीएनएल मरम्मत, देखरेख और परिचालन के क्षेत्र में भी बचत करेगा, क्योंकि इन इलेक्ट्रिक वाहनों में परिचालन पर कॉम्बस्टन इंजन के मुकाबले खर्च एक चौथाई होता है.

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