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22 September 2018

विश्व शांति दिवस

विश्वभर में 21 सितंबर 2018 को अंतरराष्ट्रीय शांति दिवस मनाया गया. यह दिवस हर जगह स्वतंत्रता, शांति और खुशी फ़ैलाने के लिए मानाया जाता है. यह दिवस सभी देशों और लोगों के बीच स्वतंत्रता, शांति और खुशी का एक आदर्श माना जाता है. 'विश्व शांति दिवस' मुख्य रूप से पूरी पृथ्वी पर शांति और अहिंसा स्थापित करने के लिए मनाया जाता है. शांति सभी को प्यारी होती है. इसकी खोज में मनुष्य अपना अधिकांश जीवन न्यौछावर कर देता है. किंतु यह काफ़ी निराशाजनक है कि आज इंसान दिन-प्रतिदिन इस शांति से दूर होता जा रहा है. आज चारों तरफ़ फैले बाज़ारवाद ने शांति को व्यक्ति से और भी दूर कर दिया है.
पृथ्वी, आकाश व सागर सभी अशांत हैं. स्वार्थ और घृणा ने मानव समाज को विखंडित कर दिया है. यूँ तो 'विश्व शांति' का संदेश हर युग और हर दौर में दिया गया है, लेकिन इसको अमल में लाने वालों की संख्या बेहद कम रही है.

अंतरराष्ट्रीय शांति दिवस की स्थापना वर्ष 1981 में संयुक्त राष्ट्र महासभा द्वारा की गयी. वर्ष 1982 से शुरू होकर 2001 तक सितम्बर महीने का तीसरा मंगलवार 'अंतरराष्ट्रीय शांति दिवस' या 'विश्व शांति दिवस' के लिए चुना जाता था. दो दशक बाद वर्ष 2001 में महासभा ने बहुमत से इस दिवस को हिंसा रोकने एवं संघर्ष-विराम की अवधि के रूप में नामित किया. वर्ष 2002 से इसके लिए 21 सितम्बर का दिन घोषित कर दिया गया. संयुक्त राष्ट्र महासभा ने यह दिन सभी देशों और उनके निवासियों में शांतिपूर्ण विचारों को सुदृढ़ बनाने के लिए समर्पित किया था. इस दिन की शुरुआत संयुक्त राष्ट्र मुख्यालय (न्यूयॉर्क) में संयुक्त राष्ट्र शांति घंटी बजाकर की जाती है. सम्पूर्ण विश्व में शांति कायम करना आज संयुक्त राष्ट्र का मुख्य लक्ष्य है. 

संयुक्त राष्ट्र चार्टर में भी इस बात का स्पष्ट उल्लेख है कि अंतरराष्ट्रीय संघर्ष को रोकने और शांति की संस्कृति विकसित करने के लिए ही यूएन का जन्म हुआ है. संघर्ष, आतंक और अशांति के इस दौर में अमन की अहमियत का प्रचार-प्रसार करना बेहद ज़रूरी और प्रासंगिक हो गया है. इसलिए संयुक्त राष्ट्रसंघ, उसकी तमाम संस्थाएँ, गैर-सरकारी संगठन, सिविल सोसायटी और राष्ट्रीय सरकारें प्रतिवर्ष 21 सितम्बर को 'अंतरराष्ट्रीय शांति दिवस' का आयोजन करती हैं. शांति का संदेश दुनिया के कोने-कोने में पहुँचाने के लिए संयुक्त राष्ट्र ने कला, साहित्य, सिनेमा, संगीत और खेल जगत की विश्वविख्यात हस्तियों को शांतिदूत भी नियुक्त कर रखा है. संयुक्त राष्ट्र महासभा ने तीन दशक पहले यह दिन सभी देशों और उनके निवासियों में शांतिपूर्ण विचारों को सुदृढ़ बनाने के लिए समर्पित किया था.

विश्व शांति दिवस के उपलक्ष्य में हर देश में जगह-जगह सफ़ेद रंग के कबूतरों को उड़ाया जाता है, जो कहीं ना कहीं 'पंचशील' के ही सिद्धांतों को विश्व तक फैलाते हैं. विश्व शांति दिवस के अवसर सफ़ेद कबूतर उड़ाने की परंपरा बहुत पुरानी है. कबूतर एक शांत स्वभाव वाला पक्षी है. भारत में विश्व शांति के लिए पंडित जवाहर लाल नेहरू द्वारा पांच मूल सिद्धांत दिए गए थे, जिन्हें पंचशील के सिद्धांत कहा गया. यह पांच सिद्धांत हैं: (i) एक दूसरे की प्रादेशिक अखंडता और प्रभुसत्ता का सम्मान करना. (ii) एक दूसरे के विरूद्ध आक्रमक कार्यवाही न करना. (iii) एक दूसरे के आंतरिक विषयों में हस्तक्षेप न करना. (iv) समानता और परस्पर लाभ की नीति का पालन करना. (v) शांतिपूर्ण सह-अस्तित्व की नीति में विश्वास रखना.

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