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06 October 2018

नोबेल पुरस्कार 2018: रसायन विज्ञान श्रेणी के लिए तीन वैज्ञानिकों के नाम की घोषणा

नोबेल पुरस्कार चयन समिति ने 03 अक्टूबर 2018 को तीन वैज्ञानिकों को रसायन विज्ञान श्रेणी में पुरस्कृत किये जाने की घोषणा की. इन वैज्ञानिकों में अमेरिकी वैज्ञानिक फ्रांसेस अर्नोल्ड (Frances H Arnold), जॉर्ज पी स्मिथ (George P Smith) और ब्रिटिश अनुसंधानकर्ता ग्रेगोरी विंटर (Gregory P Winter) शामिल हैं. चयन मंडल ने कहा कि क्रमविकास के सिद्धांतों का उपयोग कर जैव ईंधन से ले कर औषधि तक, हर चीज बनाने में इस्तेमाल होने वाले एंजाइम का विकास करने के सिलसिले में तीनों वैज्ञानिकों को रसायन विज्ञान के क्षेत्र में प्रतिष्ठित नोबेल पुरस्कार के लिए चुना गया. अर्नोल्ड रसायन विज्ञान के क्षेत्र में नोबेल जीतने वाली पांचवीं महिला हैं. उन्होंने पुरस्कार राशि 90 लाख स्वीडिश क्रोनोर (करीब 10.1 लाख डॉलर या 870,000 यूरो) की आधी रकम जीत ली. शेष आधी रकम स्मिथ और विंटर के बीच बंटेगी. स्वीडिश रॉयल एकेडमी ऑफ साइंस ने कहा रसायन विज्ञान के क्षेत्र में 2018 का नोबेल पुरस्कार क्रम विकास के इस्तेमाल को लेकर है जिससे मानवता को बड़ा फायदा पहुंचाने का लक्ष्य है.

तीनों वैज्ञानिकों ने विभिन्न क्षेत्रों में प्रोटीन के इस्तेमाल के लिए क्रम विकास के उसी सिद्धांत का इस्तेमाल किया जिसके जरिए आनुवंशिक बदलाव और चयन किया जाता है. एकेडमी की नोबेल कैमेस्ट्री कमेटी के प्रमुख क्लेस गुस्तफसन ने कहा कि 2018 के नोबेल विजेताओं ने डार्विन के सिद्धांत को परखनली में उतारा. उन्होंने आन्विक स्तर पर क्रमविकास की प्रक्रियाओं की समझ का उपयोग किया और अपनी प्रयोगशाला में उसे मूर्त रूप दिया. उन्होंने कहा कि इसके तहत क्रम विकास की गति हजारों गुणा तेज की गई और इसे नयी प्रोटीन के निर्माण के लिए इस्तेमाल किया गया. अर्नोल्ड कैलिफोर्निया इंस्टीट्यूट ऑफ टैक्नोलॉजी में प्रोफेसर हैं. उनके कार्यों ने जीवाश्म ईंधन जैसे जहरीले रसायनों की समस्या से निपटना भी मुमकिन किया है. वांछित गुणों के साथ नये प्रोटीनों के निर्माण की उनकी पद्धति का इस्तेमाल गन्ना को जैव ईंधन जैसे नवीकरणीय संसाधनों में बदलने और पर्यावरण अनुकूल रसायनिक पदार्थ बनाने में किया गया. इस तरह कम तापमान में कपड़ा धोने और बरतन धोने के डिटरजेंट जैसे रोजमर्रा के उत्पादों को बेहतर बनाया गया.

चयन मंडल ने कहा कि यूनिवर्सिटी ऑफ मिसूरी के स्मिथ और कैंब्रिज में एमआरसी लेबोरेटरी ऑफ मॉलीक्यूलर बॉयोलॉजी के विंटर (67) ने 'फेज डिसप्ले नामक अनूठा तरीका विकसित किया. इसके जरिए बैक्टीरिया को संक्रमित करने वाले वायरस- बैक्टेरियोफेज का इस्तेमाल नये प्रोटीन के इस्तेमाल हो सकता है. उनके अध्ययन से अर्थराइटिस, सोराइसिस और आंत की सूजन जैसी बीमारी के लिए औषधि के साथ ही विषाक्त पदार्थों की काट के लिए एंटी बॉडीज (प्रतिरोधक) तथा कैंसर के इलाज में भी फायदा होगा.

फ्रांसेस एच. अर्नोल्ड का जन्म वर्ष 1956 में अमेरिका स्थित पिट्सबर्ग में हुआ. उन्होंने वर्ष 1985 में यूनिवर्सिटी ऑफ़ कैलिफ़ोर्निया से पीएचडी की उपाधि हासिल की. वे वर्तमान में कैलिफ़ोर्निया इंस्टिट्यूट ऑफ़ टेक्नोलॉजी में केमिकल इंजीनियरिंग, बायोइंजीनियरिंग एवं बायोकेमिस्ट्री के प्रोफेसर हैं.

जॉर्ज पी स्मिथ का जन्म 1941 को नॉरवॉक, अमेरिका में हुआ. उन्होंने 1970 में हार्वर्ड यूनिवर्सिटी, अमेरिका से पीएचडी की डिग्री हासिल की. वे वर्तमान में यूनिवर्सिटी ऑफ़ मिसूरी, कोलंबिया, अमेरिका में बायोलॉजिकल साइंसेज़ विभाग में प्रोफेसर हैं.

ग्रेगोरी पी विंटर का जन्म 1951 लिसिस्टर, इंग्लैंड में हुआ. उन्होंने वर्ष 1976 में पीएचडी की डिग्री हासिल की. वे कैंब्रिज यूनिवर्सिटी, इंग्लैंड में एमआरसी लेबोरेटरी के अनुसंधान प्रमुख हैं.

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