मासिक करेंट अफेयर्स

06 October 2018

भारत और रूस के मध्य एस-400 मिसाइल सिस्टम सहित 8 समझौतों पर हस्ताक्षर

अमेरिकी प्रशासन की ओर से प्रतिबंध की चेतावनी के बावजूद भारत और रूस ने 05 अक्टूबर 2018 को एस-400 मिसाइल डिफेंस सिस्टम की खरीद हेतु समझौते पर हस्ताक्षर किये हैं. दुश्मन देशों के खतरनाक मिसाइलों को हवा में ही नष्ट करने वाली रूस की वायु रक्षा प्रणाली एस-400 अब भारत की रक्षा करेगी. भारत और रूस के बीच शुक्रवार को 19वीं सालाना बैठक थी, जिसमें अगुवाई करने के लिए राष्ट्रपति पुतिन गुरुवार को नई दिल्ली पधारे थे. शुक्रवार को उनकी पीएम नरेंद्र मोदी के साथ कुल मिला कर 4.30 घंटे लंबी बातचीत हुई. इसमें डेढ़ घंटे दोनों नेताओं की एकांत में वार्ता हुई.

दोनों नेताओं के बीच रूस में भारत की तरफ से नई तेल ब्‍लॉक खरीदने, साथ मिलकर नागरिक विमान बनाने, मुक्त व्यापार समझौते (एफटीए) पर शीघ्रता से सहमति बनाने, साथ मिल कर दूसरे देशों में कनेक्टिविटी परियोजनाओं को लागू करने जैसे अहम मुद्दों पर ठोस बात हुई. अगले पांच वर्षों का द्विपक्षीय सहयोग का एजेंडा बनाने की जिम्मेदारी दोनो देशों के विदेश मंत्रियों को सौंपा गया. साथ ही आठ समझौतों पर हस्ताक्षर भी हुए, जिसे सार्वजनिक किया गया. लेकिन दुनिया की सबसे आधुनिक वायु रक्षा प्रणाली एस-400 को लेकर हुए समझौते को सार्वजनिक नहीं किया गया है.

भारत को एस-400 ट्रायंफ सिस्टम की आपूर्ति दो वर्षो बाद शुरू हो जाएगी. भारत फिलहाल इसके पांच स्क्वाड्रन खरीदेगा. हर स्क्वाड्रन में दो मिसाइल सिस्टम होते हैं. इसकी लागत तकरीबन 39 हजार करोड़ रुपये आएगी. इसे देश के पांच अहम शहरों या रणनीतिक दृष्टिकोण से अहम माने जाने वाले इलाकों में तैनात किया जा सकता है. यह पाकिस्तान और चीन की तमाम आधुनिक मिसाइलों को नष्ट कर सकता है. यह मिसाइलों को 600 किलोमीटर दूर ही पहचान लेता है और उन्हें लक्ष्य से पहुंचने से 60 किलोमीटर पहले नष्ट कर सकता है. यही नहीं, यह एक साथ 36 निशानें लगा सकता है. इस तरह से यह पूरे मिसाइल अटैक को निष्फल बनाने की क्षमता रखता है. बता दे की भारत से पहले चीन रूस से इस प्रणाली को खरीद चुका है. दोनों देशों के बीच इसकी और खरीद को लेकर बातचीत जारी है.  

भारत के साथ एक बड़ा सौदा करके निश्चित तौर पर रूस बेहद खुश है. समझौते के उपरांत रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने कहा कि भारत और रूस की मैत्री अद्वितीय रही है. पुतिन ने कहा कि पिछले वर्ष दोनों देशों के बीच व्यापारिक संबंधों में 21 प्रतिशत की बढ़ोतरी हुई थी और इस वर्ष अब तक 20% वृद्धि देखी गई है. पुतिन ने अपने संबोधन में कहा कि रूस की रेलवे कंपनी भारत में अत्याधुनिक रेलवे ट्रैक का निर्माण करेगी. रूस भारत को पहले मानव अंतरिक्ष अभियान में सहायता प्रदान करेगा. इसके अतिरिक्त, पुतिन ने अपने संबोधन में कहा कि रूस अगले 20 वर्षों में भारत में 12 परमाणु संयंत्र स्थापित करने में सहायता करेगा. पुतिन ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को 2019 में होने वाले व्लादिवोस्तक आर्थिक सम्मेलन में मुख्य अतिथि के तौर पर आमंत्रित किया. रूस ने कहा है कि भारत व रूस के पारंपरिक रक्षा सहयोग के क्षेत्र में एक नये युग का आरंभ हो रहा है.

ता दे की भारत व रूस के बीच एस-400 खरीद पर अमेरिका की भृकुटियां तनी हुई थी क्योंकि उसने रूस पर काउंटरिंग अमेरिका एडवर्सरीज थ्रू सैंक्शन एक्ट (काटसा) लगा रखा है. शुक्रवार को नई दिल्ली स्थित अमेरिकी दूतावास ने एस-400 पर एक प्रेस विज्ञप्ति जारी कर यह संकेत देने की कोशिश की है कि वह इस सौदे को लेकर फिलहाल विचार कर रहा है. इसके मुताबिक, ''काटसा प्रतिबंध का मकसद रूस के रक्षा क्षेत्र में बाहरी मुद्रा को आने से रोकना है. लेकिन यह हमारे रणनीतिक साझेदारों की सैन्य क्षमताओं को नुकसान के लिए नहीं है. साथ ही यह हर सौदे पर प्रतिबंध लगाने का तरीका नहीं है बल्कि यह हर सौदों के मुताबिक फैसला करता है. इसके तहत छूट देने की भी व्यवस्था है लेकिन वह काफी कठिन है. काटसा के तहत सौदों को छूट देने पर विचार किया जाएगा.'' बता दें कि अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने अगस्त 2017 में 'काटसा' पर हस्ताक्षर किए थे. ट्रंप ने अगस्त 2017 में रूस पर प्रतिबंध लगाने के मकसद से इस कानून पर हस्ताक्षर किए थे. इसे ‘काटसा’ नाम दिया गया. इसके तहत अमेरिका रूस से बड़ा रक्षा समझौता करने वाले देशों पर प्रतिबंध लगा सकता है.

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