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16 October 2018

पर्यावरणविद प्रोफेसर जी डी अग्रवाल का निधन

गंगा के मुद्दे पर 22 जून से अनशन कर रहे पर्यावरणविद जीडी अग्रवाल (GD Agrawal) का निधन हो गया. जीडी अग्रवाल का निधन उस समय हुआ जब उन्हें हरिद्वार से दिल्ली लाया जा रहा था. आईआईटी में प्रोफेसर रह चुके जीडी अग्रवाल इंडियन सेंट्रल पॉल्यूशन कंट्रोल बोर्ड में सदस्य भी रह चुके थे. हालांकि अब वह संन्यासी का जीवन जी रहे थे. बता दें कि गंगा में अवैध खनन, बांधों जैसे बड़े निर्माण और उसकी अविरलता को बनाए रखने के मुद्दे पर पर्यावरणविद स्वामी ज्ञान स्वरूप सानंद यानी प्रो. जीडी अग्रवाल अनशन पर थे. स्वामी सानंद गंगा से जुड़े तमाम मुद्दों पर सरकार को पहले भी कई बार आगाह कर चुके थे और इसी साल फरवरी में उन्होंने प्रधानमंत्री मोदी को पत्र लिख गंगा के लिए अलग से क़ानून बनाने की मांग की थी. कोई जवाब ना मिलने पर 86 साल के स्वामी सानंद 22 जून को अनशन पर बैठ गए थे. इस बीच दो केंद्रीय मंत्री उमा भारती और नितिन गडकरी उनसे अपना अनशन तोड़ने की अपील की थी, लेकिन वो नहीं माने.

प्रसिद्ध पर्यावरणविद जी डी अग्रवाल आईआईटी कानपुर से सेवानिवृत्त प्रोफेसर थे. उन्होंने सेवानिवृत्त होने के बाद शंकराचार्य स्वानमी स्विरूपानंद सरस्वसती के प्रतिनिधि स्वाउमी अविमुक्तेतश्वारानंद से संत की दीक्षा ली थी. दीक्षा लेने के बाद उन्हें ज्ञानस्वरूप सानंद के नाम से जाना जाने लगा. जी डी अग्रवाल ने स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद से अंतिम इच्छा जाहिर करते हुए कहा था कि मरणोपरांत उनके शरीर को वाराणसी के काशी हिंदू विश्वविद्यालय को दे दिया जाए. उनके अनशन के 19वें दिन पुलिस ने उन्हें अनशन की जगह से ज़बरदस्ती हटा दिया था. वह गंगा प्रदूषण, उसमें होने वाले अवैध खनन जैसे मुद्दों पर अनशन कर रहे थे. फरवरी में उन्होंने पीएम मोदी को दो बार चिट्ठी लिखकर गंगा के लिए अलग से कानून बनाने की मांग की थी लेकिन प्रतिउत्तर नहीं मिला था.

वह इससे पहले भी गंगा के लिए आमरण अनशन कर चुके थे. वर्ष 2012 में आमरण अनशन पर बैठे अग्रवाल ने सरकार की ओर से मांगें माने जाने का आश्वासन मिलने के बाद अनशन तोड़ दिया था. उस दौरान भी उनकी तबीयत बिगड़ गई थी और इलाज के लिए उन्हें वाराणसी लाया गया था. प्रो. अग्रवाल व अन्‍य कार्यकर्ताओं की मांगों पर तत्‍कालीन केंद्रीय पर्यावरण मंत्री जयराम रमेश ने गंगा की सहायक नदी भागीरथी पर डैम बनाने के काम को रोकने का आदेश दिया था.

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