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01 October 2018

चीन ने पहली बार एक साथ तीन हाइपरसोनिक विमानों के मॉडल का सफल परीक्षण किया

चीन लगातार अपनी सैन्य क्षमता बढ़ाने में लगा हुआ है. चीन ने हाल ही में पहली बार एक साथ हाइपरसॉनिक विमान के तीन मॉडलों का सफलतापूर्वक परीक्षण किया. .हाइपरसोनिक विमान के तीन मॉडलों का परीक्षण किया गया. फुटेज से पता चलता है कि तीनों मॉडल की डिजाइन अलग-अलग है. तीनों को डी 18-1एस, डी18-2एस और डी18-3एस कोड नाम दिया गया है. इन विमानों को गुब्बारे के सहारे छोड़ा गया. चीन की मीडिया की खबर के मुताबिक, हाइपरसॉनिक विमान की रफ्तार को भी आवश्यकता अनुसार घटाया-बढ़ाया जा सकता है. हॉन्ग कॉन्ग स्थित
'साउथ चाइना मॉर्निंग पोस्ट' के मुताबिक इस तरह के हाइपरसॉनिक विमानों का चीन ने पहली बार परीक्षण किया है.

हाइपरसॉनिक एयरक्राफ्ट उन विमानों को कहते हैं जो ध्वनि के वेग से भी अधिक वेग से उड़ सकते हैं. ऐसे विमानों का विकास 21वीं सदी में हो रहा है. इनका उपयोग प्रायः अनुसंधान एवं सैनिक उपयोग के लिये तय किया गया है. यह लड़ाकू विमान ध्वनि के वेग के पाँच गुना से भी अधिक वेग (5 मैक से अधिक) से उड़ते हैं. यह परमाणु हथियार ढोने में संपन्न विमानों पर बेहतर तरीके से हमला कर सकेगा.


इससे पहले, पिछले महीने भी चीन के वैज्ञानिकों ने पहली बार स्टारी स्काय-2 नामक हाइपरसॉनिक ग्लाइडर का परीक्षण किया था. इसे रॉकेट के जरिए छोड़ा गया, फिर यह अपने शॉक वेव मैक 6 (ध्वनि की रफ्तार से 6 गुना या 7,344 किलोमीटर प्रति घंटे) पर चलता है. रिपोर्ट के मुताबिक, पूरी तरह विकसित होने के बाद इसकी रफ्तार इतनी होगी कि यह मौजूदा जेनरेशन की मिसाइल विरोधी डिफेंस सिस्टम में प्रवेश कर सकता है. आपको बता दें कि चीन का इस साल का रक्षा बजट 175 बिलियन यूएस डॉलर है और वह अमेरिका, रूस और यूरोपीय संघ के देशों के साथ मिलकर डिफेंस और डिवेलपमेंट के क्षेत्र में भारी निवेश कर रहा है. गौरतलब है कि चीन 2014 से ही हाइपरसोनिक ग्लाइडर का परीक्षण कर रहा है. चीन के अलावा अमेरिका और रूस भी इसी तरह के प्रयोग कर रहे हैं.


 

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