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19 October 2018

हिमाचल प्रदेश में सुरंग के अंदर देश का पहला रेलवे स्टेशन बनेगा

हिमाचल प्रदेश में सुरंग के अंदर रेलवे स्टेशन बनाया जाएगा जो देश में इस तरह का पहला स्टेशन होगा. हिमाचल प्रदेश के केलांग में बनने वाला यह स्टेशन समुद्र तल से तीन हजार मीटर की ऊंचाई पर होगा. यह चीन-भारत सीमा के लिहाज से रणनीतिक महत्व के भानुपल्ली-बिलासपुर-मनाली-लेह रेलमार्ग का हिस्सा है. केलांग, हिमाचल प्रदेश के लाहौल-स्पीति जिले का प्रशासनिक केंद्र है. यह मनाली से 26 किलोमीटर और भारत-तिब्बत सीमा से 120 किलोमीटर दूर है. अभी इस रेलमार्ग पर सर्वेक्षण चल रहा है. एक बार इसके पूरा होने पर यह देश का पहला ऐसा रेलवे स्टेशन होगा जो सुरंग के भीतर होगा. 

यह स्टेशन लगभग 3,000 मीटर की ऊंचाई पर होगा और अंदर 27 किलोमीटर लंबी सुरंग का हिस्सा होगा. प्राथमिक सर्वेक्षण के अनुसार, इस मार्ग पर 74 सुरंग बननी हैं. साथ ही 124 बड़े पुल और 396 छोटे पुलों का भी निर्माण किया जाना है. इस रेलमार्ग के लिए अंतिम सर्वेक्षण 30 महीनों में पूरा होने की उम्मीद है. यह कार्य तीन चरणों में पूरा किया जाएगा. पहले फेस में डिजिटल माध्यम से मॉडलों का मूल्यांकन होगा, दूसरे फेज में बेहतर अलाइनमेंट को लेकर काम होगा. तीसरे फेज में पुल और सुरंगों की एक परियोजना रिपोर्ट बनेगी. इसमें अधिकतर पुल और सुरंगे होंगी.

इस रेलमार्ग के पूरा हो जाने पर दिल्ली और लेह के बीच की दूरी पूरा करने में लगने वाला समय करीब आधा हो जाएगा. अभी इस दूरी को पूरा करने में करीब 40 घंटे लगते हैं, रेलमार्ग बनने के बाद यह समय 20 घंटे हो जाएगा. इस मार्ग के पूरा होने पर बिलासपुर और लेह के बीच में सुंदरनगर, मंडी, मनाली, केलांग, कोकसार, दारचा, उप्शी और कारू रेलवे स्टेशन होंगे. यह रेलमार्ग भारत-चीन सीमा पर सामान और कर्मचारियों की आवाजाही के लिहाज से रणनीतिक तौर पर अहम है.यह परियोजना देश की सामरिक जरूरतों, सामाजिक-आर्थिक विकास और पर्यटन की दृष्टि से महत्वपूर्ण है. इससे लेह-लद्दाख के विकास में तेजी आएगी और पर्यटन को भी बढ़ावा मिलेगा. अभी लेह से सबसे नजदीक रेलवे स्टेशन हिमाचल प्रदेश का भानुपल्ली है और वहां से लेह की दूरी 730 किलोमीटर है. रेल सेवा शुरू होने से पूरे वर्ष आवागमन संभव हो सकेगा. 

चीन की सीमा के नजदीक होने के कारण यह रेल परियोजना सामरिक रूप से भी बेहद महत्वपूर्ण है. इसलिए इसके निर्माण में भारतीय सेना की जरूरतों का भी पूरा ख्याल रखा जा रहा है. अधिक ऊंचाई की वजह से लेह-लद्दाख में ऑक्सीजन की कमी रहती है. इसे ध्यान में रखकर यहां चलने वाली ट्रेन में विशेष तरह के कोच लगाए जाएंगे. स्टेशन के बनावट में भी इसका ध्यान पूरा रखा जाएगा कि यात्रियों को किसी तरह की परेशानी नहीं हो.

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