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17 October 2018

उत्तर प्रदेश सरकार ने ‘इलाहाबाद’ का नाम बदलकर ‘प्रयागराज’ किया

उत्तर प्रदेश सरकार ने इलाहाबाद का नाम बदलकर प्रयागराज करने के एक प्रस्ताव को मंजूरी दे दी. कैबिनेट की बैठक के बाद मंत्री सिद्धार्थ नाथ सिंह ने कहा, 'इलाहबाद आज से प्रयागराज के नाम से जाना जाएगाी.' बता दें कि कांग्रेस ने इहालाबाद का नाम बदलने का विरोध किया है. स्थानीय लोग और संत समुदाय लंबे समय से इस शहर का नाम बदलकर प्रयागराज करने की मांग कर रहा था. योगी सरकार ने भी कुछ दिनों पहले कहा कि वह इस शहर का नाम बदलकर प्रयागराज करने के बारे में विचार कर रही है. गौरतलब है कि पिछले साल अक्टूबर मे योगी सरकार ने मुगलशराय रेलेव स्टेशन का नाम बदलकर दीन दयाल उपाध्याय (डीडीयू) स्टेशन कर दिया. योगी सरकार के इस पहल का भी विपक्ष ने विरोध किया था.

अकबरनामा और आईने अकबरी व अन्य मुगलकालीन ऐतिहासिक पुस्तकों से ज्ञात होता है कि अकबर ने सन 1574 के आसपास प्रयागराज में किले की नींव रखी. माना जाता है कि अकबर ने यहां नया नगर बसाया जिसका नाम उसने इलाहाबाद रखा. उसके पहले तक इसे प्रयागराज के ही नाम से जाना जाता था. इसके अतिरिक्त रामचरित मानस में इसे प्रयागराज ही कहा गया है. इस बात का उल्लेख वाल्मीकि रामायण में है कि संगम के जल से प्राचीन काल में राजाओं का अभिषेक होता था. सबसे प्राचीन एवं प्रामाणिक पुराण मत्स्य पुराण के 102 अध्याय से लेकर 107 अध्याय तक में इस तीर्थ के महात्म्य का वर्णन है. इसमें लिखा है कि प्रयाग प्रजापति का क्षेत्र है जहां गंगा और यमुना बहती हैं.

सबसे पहले किसी शहर के स्थानीय लोग या जनप्रतिनिधि नाम बदलने का प्रस्ताव राज्य सरकार को भेजते हैं.
राज्य मंत्रिमंडल प्रस्ताव पर विचार करती है और मंजूरी देने के बाद राज्यपाल की सहमति को भेजती है. राज्यपाल प्रस्ताव पर अनुंशसा देने के साथ अंतिम मंजूरी के लिए केंद्रीय गृह मंत्रालय को भेजता है. गृह मंत्रालय से हरी झंडी मिलने के बाद राज्य सरकार नाम बदलने की अधिसूचना जारी करती है. पौराणिक और धार्मिक महत्व को देखते हुए वर्षों से इलाहाबाद का नाम प्रयागराज करने की मांग उठती आ रही थी. मगर इस पर कभी भी अंतिम निर्णय नहीं लिया गया था. मार्च 2017 में योगी सरकार के उत्तर प्रदेश की सत्ता सँभालने पर उन्होंने यह वादा भी किया कि वे इलाहाबाद को प्रयागराज कर देंगे. इसके बाद कई संतों ने इलाहाबाद को प्रयागराज करने की मांग उठाई.

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