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12 November 2018

भारतीय सेना में 30 वर्ष बाद दो तोपों को शामिल किया गया

भारतीय सेना में 09 नवम्बर 2018 को दो तोपों को शामिल किया गया है. 30 साल के लंबे अंतराल के बाद भारतीय सेना में किसी तोप को शामिल किया गया है. इनमें एक अमेरिकन तोप है तो दूसरी कोरियन तोप है. रक्षा मंत्री निर्मला सीतारमण ने देवलाली में एम 777 अल्ट्रा लाइट हॉवित्जर और के 9 वज्र सेल्फ़ प्रोपेल्ड गन को सेना को सौंपा. बोफोर्स के बाद ये पहली 155 एमएम तोप है जो कि भारतीय सेना में शामिल हुई है. इससे आर्टिलरी की ताक़त में इज़ाफ़ा होगा. तोपों की कमी से जूझ रही भारतीय सेना के लिए के-9 वज्र और एम-777 तोपें बेहद कारगर साबित होगा. जानकारी के मुताबिक, भारतीय सेना को दक्षिण कोरिया से 100 तोपें मिलने जा रही हैं. इसके लिए मेक इन इंडिया के तहत दक्षिण कोरिया की एक बड़ी कंपनी हानवा-टेकविन भारत की एल एंड टी के साथ मिलकर भारतीय सेना के लिए 100 आर्टेलैरी-गन बना रही है. पहली खेप में 10 तोपें सीधे कोरिया से भारतीय सेना को मुहैया कराईं जायेंगी. बाकी 90 तोपें 155x52 कैलेबर की ये तोपें पुणे के करीब तालेगांव में एल एंड टी के प्लांट में तैयार की जा रही हैं.

इस प्रोजेक्ट में एल एंड टी और कोरियाई कंपनी, हानवा-टेकविन की 50-50 प्रतिशत भागेदारी है. मई 2017 में हुए इस 'बाय-ग्लोबल' सौदे की कुल कीमत करीब 4300 करोड़ रूपये है. दक्षिण कोरिया की सेना वर्ष 1999 से इन तोपों का इस्तेमाल कर रही है. भारतीय सेना के मुताबिक, टैंक नुमा ये खास तरह की 'के9 वज्र' तोप रेगिस्तानी इलाकों के लिए तैयार की गई है. बताते चलें कि भारत की एक लंबी सीमा जो पाकिस्तान से सटी हुई है वो राजस्थान के थार-रेगिस्तान से होकर गुजरती है. ये होवित्जर गन चालीस (28-38) किलोमीटर तक मार कर सकती है. के-9 की खासयित ये है कि ये डायरेक्ट फायरिंग में एक किलोमीटर दूरी पर बने दुश्मन के बंकर और टैंकों को भी तबाह करने में सक्षम है.

आपको बता दें कि दुनिया में इस तरह से सीधे फायरिंग करने वाली कम ही तोपें हैं. अधिकतर तोपें ट्रैजेक्ट्री में फायरिंग करती हैं. 155X39 कैलेबर की वज्र एक सेल्फ प्रोपेलड ट्रेक्ड तोप है. यानि इसे एक जगह से दूसरी जगह ले जाने के लिए किसी ट्रक या ट्रैक्टर की जरूरत नहीं होती है. इस महीने यानि नबम्बर तक 10 तोपें भारतीय सेना को मिल जायेंगी. बाकी 40 तोपें अगले साल नबम्बर तक और अगली 50 की खेप नबम्बर 2020 तक भारतीय सेना को मिल जायेगी. के-9 वज्र तोपों की कुल पांच (05) रेजीमेंट भारतीय सेना में होंगी और पहली रेजीमेंट जुलाई 2019 तक खड़ी हो जायेगी. गौरतलब है कि ये के-9 तोप दक्षिण कोरिया के साथ साथ यूएई, पोलैंड और फिनलैंड जैसे देश इस्तेमाल कर रही हैं. 

इसके अलावा देवलाली में अमेरिका से सीधे खरीदी गईं एम-777 लाइट होवित्जर को भी सेना में शामिल किया गया. भारत ने कुल 145 अल्ट्रा लाईट होवित्जर तोपें कुल 5000 करोड़ रूपये में अमेरिका से खरीदी हैं. बेहद ही हल्की इन तोपों को हैलिकॉप्टर या फिर ट्रांसपोर्ट एयरक्राफ्ट के जरिए उन पहाड़ी इलाक़ों तक ले जाया जा सकता है जहाँ सड़कों के जरिए पहुँच पाना थोड़ी मुश्किल होता है. इन तोपों को भारतीय सेना ने अपनी नई माउंटेन स्ट्राइक कोर के लिए खरीदा है जिसे खासतौर से चीन सीमा पर तैनात करने के लिए तैयार किया गया है. अबतक 04 एम-777 होवित्जर भारत पहुंच चुकी हैं और बाकी भी अगले दो-तीन साल तक में भारतीय सेना को मिल जाने की उम्मीद है. एम-777 कूी कुल नौ (09) रेजीमेंट सेना में होंगी. करीब 30 किलोमीटर तक मार करने वाली ये तोपें स्टेट ऑफ द आर्ट टेक्नोलोजी से लैस है जो इसकी मारक क्षमता और गति को काफी तेज और सटीक बना देती है. इन दोनों तोपों के साथ साथ रक्षा मंत्री निर्मला सीतारमण कल ही देवलाली में पुरानी तोपों के लिए कम्पोजिट गन ट्रैक्टर को भी सेना में शामिल करेंगी. ये ट्रै्क्टर तोपों के मूवमेंट में इस्तेमाल की जाती हैं.

अस्सी के दशक में बोफोर्स तोपों के सौदे में हुए विवाद के बाद से भारतीय सेना को कोई नईं होवित्जर गन नहीं मिल पाईं थीं. लेकिन करगिल युद्ध में तोपों की अहम भूमिका को देखते हुए 1999 में ही सेना ने अपने तोपखाने के आधुनिकिरण का प्लान तैयार कर लिया था. इसके तहत साल 2027 तक 2800 तोपें भारतीय सेना में शामिल करने का लक्ष्य है. यही वजह है कि पिछले साल रक्षा मंत्रालय ने आर्टिलरी गन यानि तोपखाने के आधुनिकरण प्रक्रिया को तेज करते हुए 814 ट्रक माउंटेड आर्टिलरी गन के लिए रिक्वेस्ट ऑफ़ इनफ़ॉर्मेशन (आरएफआई) जारी किया था. ये तोपें 'बाय ग्लोबल' के तहत सेना के लिए खरीदी जानी थीं. यानि भारतीय कंपनियों किसी विदेशी कंपनी के साथ मिलकर ये तोपें सेना को मुहैया करा सकती हैं. पंद्रह हज़ार करोंड से ज़्यादा की क़ीमत की ये 155 एमएम कैलिबर की तोपें भारतीय सेना की ताक़त को और बढ़ाएंगे. इसके लिए 155 एमएम की अलग अलग कैलिबर की तोपें ली जानी है. इनमें से 1580 टोड तोप जो की गाड़ियों के ज़रिये खींची जाने वाली हैं और 814 ट्रक माउंटेड गन यानी गाड़ियों पर बनी तोपें हैं.

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