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07 November 2018

भारतीय रेलवे ने ब्रॉड गेज मार्ग पर मानव रहित क्रॉसिंग को समाप्त किया

भारतीय रेलवे ने ब्रॉड गेज पर सभी मानवरहित रेलवे क्रॉसिंग बंद करने का निर्णय लिया है. 01 अप्रैल 2018 के अनुसार ब्रॉड गेज मार्गों पर 3479 मानव रहित लेवल क्रॉसिंग हैं. पिछले सात महीनों में कुल मिलाकर ऐसे 3402 क्रॉसिंग समाप्त किए गए हैं. बाकी बचे 77 क्रॉसिंग दिसंबर 2018 तक बंद करने की योजना है. 130 किलोमीटर प्रतिघंटे से अधिक गति वाले रेल मार्गों और उप-शहरी मार्गों पर पड़ने वाले सभी मानवरहित क्रॉसिंग समाप्त किए गए हैं. अधिकांश मानव रहित स्तर क्रॉसिंग (यूएमएलसी) को या तो भूमिगत मार्गों /आरयूबी के प्रावधानों या कर्मचारी तैनात करके समाप्त किया गया है. इन मानव रहित क्रासिंग को सबवे, रोड अंडर ब्रिज अथवा क्रासिंग पर गार्ड की नियुक्ति करके समाप्त किया गया है.

यूएमएलसी को समाप्त किए जाने से मानवरहित लेवल क्रॉसिंग्स पर होने वाली दुर्घटनाएं जो 2009-10 में 65 थीं वो 2018-19 में घटकर 3 रह गई हैं. भारतीय रेलवे ने कुल 16 जोन में से 12 रेलवे जोन में ब्रॉड गेज मार्गों पर मानव रहित क्रासिंग से समाप्त किया हैं. 12 क्षेत्रीय रेलवे – मध्य रेलवे, पूर्वी रेलवे, पूर्व मध्य रेलवे, पूर्व तट रेलवे, उत्तर पूर्व रेलवे, उत्तर पूर्व फ्रंटियर रेलवे, दक्षिण मध्य रेलवे, दक्षिण पूर्व रेलवे, दक्षिण पूर्व मध्य रेलवे, पश्चिम रेलवे, पश्चिम मध्य रेलवे के ब्रॉड गेज मार्ग अब यूएमएलसी से मुक्त हैं.

भारतीय रेल एशिया का दूसरा सबसे बड़ा रेल नेटवर्क तथा एकल सरकारी स्वामित्व वाला विश्व का चौथा सबसे बड़ा रेल नेटवर्क है. भारतीय रेलवे का 1,51,000 किलोमीटर ट्रैक, 7000 स्टेशन, 13 लाख कर्मचारी तथा 160 वर्षों का इतिहास है. भारत में रेलवे की शुरुआत 16 अप्रैल 1853 को बोरी बंदर और थाने के बीच हुई थी. राष्‍ट्रीय आपात स्थिति के दौरान आपदाग्रस्त क्षेत्रों में राहत सामग्री पहुंचाने में भारतीय रेलवे अग्रणी रहा है. यह ऊर्जा सक्षम परिवहन मोड, जो बड़ी मात्रा में जनशक्ति के आवागमन के लिए बड़ा ही आदर्श एवं उपयुक्त है, बड़ी मात्रा में वस्तुओं को लाने ले जाने तथा लंबी दूरी की यात्रा के लिए अत्यन्त उपयुक्त है. 

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