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26 November 2018

केन्द्र सरकार ने करतारपुर कॉरिडोर बनाने की मंजूरी दी

केंद्र सरकार ने वर्ष 2019 में गुरु नानक देव की 550वीं जयंती मनाने के उपलक्ष्य में करतारपुर कॉरिडोर को मंजूरी देकर बड़ा निर्णयलिया है. मंत्रिमंडलीय वार्ता में 22 नवम्बर 2018 को करतारपुर कॉरिडोर को लेकर बड़ा फैसला लिया गया है. केंद्र सरकार ने फैसला किया है कि गुरुदासपुर स्थित डेरा बाबा नानक से लेकर अंतरराष्ट्रीय सीमा तक एक करतारपुर करॉरिडोर बनाया जाएगा. यह वैसा ही होगा, जैसे कोई बहुत बड़ा धार्मिक स्थल होता है. यहां पर वीजा और कस्टम की सुविधा मिलेगी. इसको व्यापक तरीके से करतारपुर साहिब कॉरिडोर के तहत विकसित किया जायेगा जिसकी लम्बाई लगभग तीन किलोमीटर होगी. इस कॉरिडोर को भारत सरकार फंड करेगी. सिखों द्वारा लंबे समय से इस कॉरिडोर के निर्माण की मांग की जा रही थी. सिख समुदाय के लिए करतारपुर साहिब काफी मायने रखता है. यह सिखों का पवित्र तीर्थ स्थल है जहां गुरुनानक देवजी ने अपने जीवन के 18 साल बिताए थे.

आपको बता दें कि, पाकिस्तान की सिमा पर सिखों का पवित्र करतारपुर साहिब गुरुद्वारा है. यहां पर गुरुनानक देव रहते थे और यहीं पर उनका निधन भी हुआ था. गुरुनानक ने यहां 18 साल गुजारे थे और उनकी याद में यहां गुरुद्वारा बनाया गया. यह पंजाब प्रांत से नजदीक है. श्री करतापुर साहिब गुरुद्वारे को पहला गुरुद्वारा माना जाता है जिसकी नींव श्री गुरु नानक देव जी ने रखी थी. हालांकि बाद में रावी नदी में बाढ़ के कारण यह बह गया था. इसके बाद वर्तमान गुरुद्वारा महाराजा रणजीत सिंह ने बनवाया था. कहा जाता है कि इस क्षेत्र का धनाड्य व्यक्ति दुनी चंद गुरुनानक से मिला था और उन्होंने 100 एकड़ जमीन दान दी थी. गुरु नानक ने भेंट स्वीकार की और वहां रहकर एक छोटी इमारत का निर्माण करवाया. उन्होंने यहां रहकर भूमि की जुताई भी की और खेती भी की. गुरु नानकदेव ने इसी स्थान से 'नाम जपो, किरत करो और वंड छको' (ईश्वर का नाम लें, मेहनत करें और बांट कर खाएं) का फलसफा दिया था.

पाकिस्तान द्वारा गुरूद्वारे में जाने की इजाजत न देने के कारण सिखों को दूरबीन से ही करतारपुर साहिब के दर्शन करना पड़ता है. जिसके चलते काफी लंबे समय से सिखों द्वारा करतारपुर कॉरिडोर बनाने की मांग चल रही थी. कॉरिडोर बनने के बाद श्रद्धालु पंजाब के गुरुदासपुर जिले से पकिस्तान स्थित करतारपुर साहिब जाकर दर्शन कर सकेंगे. फिलहाल यह स्थल पाकिस्तान में भारतीय सीमा से करीब चार किलोमीटर दूर है और अभी पंजाब के गुरदासपुर में डेरा बाबा नानक बॉर्डर आउटपोस्ट से दूरबीन से श्रद्धालु इस गुरूद्वारे के दर्शन करते हैं.

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