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30 November 2018

रक्षा मंत्री ने मिशन ‘रक्षा ज्ञान शक्ति’ लॉन्च किया

भारत की रक्षा मंत्री निर्मला सीतारमण ने 27 नवंबर 2018 को मिशन रक्षा ज्ञान शक्ति का शुभारंभ किया. इस मिशन का उद्देश्य रक्षा उद्योग में आविष्कार औऱ नए उत्पादों के विकास को प्रोत्साहित करना है. रक्षा मंत्री ने मिशन मोड प्रोग्राम के तहत मिशन रक्षा ज्ञान शक्ति का कार्यक्रम शुरु किया. रक्षा मंत्री ने इस मौके पर अपने सम्बोधन में कहा कि रक्षा अनुसंधान विकास संगठन (डीआरडीओ) को अनुसंधान एवं विकास में सक्रिय भूमिका निभानी होगी. उन्होंने कहा, ‘डीआरडीओ को नवोन्मेष के प्रति ज्यादा सक्रिय रहने के लिए आत्मनिरीक्षण करना चाहिए.’ मंत्री ने कहा कि अनुसंधान एवं विकास में बड़े पैमाने पर निवेश की जरूरत है और सरकार ऐसा करने की इच्छुक है. उन्होंने अपने मंत्रालय से पारदर्शिता लाकर और वर्तमान खामियों को दूर कर रक्षा क्षेत्र में नवोन्मेष की पारंपरिक बाधाओं को तोड़ने की भी बात कही.

इस ऑपरेशन को लॉन्च करने का मकसद रक्षा उत्पादों के स्वदेशीकरण को बढ़ावा देने के साथ-साथ आत्मनिर्भरता को बढ़ाना है. रक्षा मंत्रालय की ओर से उठाया गया ये कदम प्रौद्योगिकी के लिए विदेशी कंपनियों की निर्भता को कम करेगा. इस कार्यक्रम में रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन (डीआरडीओ), रक्षा सार्वजनिक क्षेत्र उपक्रमों और आयुध फेक्ट्रियों द्वारा विशेष आविष्कारों तथा नवाचारों को प्रस्तुत किया गया. कार्यक्रम में इन उत्पादों के लिए बौद्धिक संपदा अधिकार के तहत सफल आवेदनों का भी परिचय दिया गया. राष्ट्र के लिए उपयोगी उत्पादों के आविष्कार के संबंध में श्रीमती सीतारमण ने कुछ वैज्ञानिकों का भी स्वागत किया. गुणवत्ता आश्वासन महानिदेशालय को कार्यक्रम के समन्वय और कार्यान्वयन की जिम्मेदारी दी गई है.

बौद्धिक सम्पदा के क्षेत्र में भारतीय रक्षा वैज्ञानिको और इंजीनियरों को ट्रेनिग दी जा रही है. इसके तहत अब तक आर्डनेंस फैक्ट्री बोर्ड औऱ सार्वजनिक रक्षा उपक्रमों के दस हजार स्टाफ को ट्रेनिंग दी गई है. इसका उद्देश्य भारतीय रक्षानिर्माण में बौद्धिक सम्पदाके प्रति जागरुरता पैदा करना और एक नई संस्कृति का विकास करना है.

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