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23 November 2018

वैज्ञानिकों ने आकाशगंगा में नए तारामंडल की खोज की

वैज्ञानिकों ने मिल्की वे आकाशगंगा में एक नए और विशाल तारामंडल की मौजूदगी का पता लगाया है जो उन मौजूदा सिद्धांतों को चुनौती देता है कि बड़े सितारों का अस्तित्व अंतत: कैसे खत्म हो जाता है. अमेरिका के न्यूयॉर्क विश्वविद्यालय में नासा सगन के एक शोधार्थी बेंजमिन पोप ने कहा, “हमारी आकाशगंगा में खोजा गया यह अपने आप में एक अनोखा तारामंडल है.” वैज्ञानिकों ने गामा रे बर्स्ट प्रोजेनिटर प्रणाली का पता लगाया जो एक प्रकार का सुपरनोवा है जो प्लाज्मा की अत्यंत शक्तिशाली और संकरी धारा को प्रस्फुटित करता है और जिसके बारे में माना जाता है कि ऐसा सिर्फ दूरस्थ आकाशगंगाओं में ही होता है. 

वैज्ञानिकों ने गामा रे बर्स्ट प्रोजेनिटर सिस्टम का पता लगाया जो एक तरह का सुपरनोवा है. इस सुपरनोवा से प्लाज्मा की काफी शक्तिशाली और संकरी धारा निकलती रहती है. माना जाता है कि ऐसी क्रिया सिर्फ दूर स्थित आकाशगंगाओं में ही होती है. ऐसा माना जाता है कि यह केवल ऐसी आकाशगंगाओं में मिलता है जो बहुत दूरी पर हैं. इस तारामंडल के बारे में विस्तार से नेचर एस्ट्रोनोमी पत्रिका में बताया गया है और इसे 'एपेप' (Apep) नाम दिया गया है. इस खोज में नीदरसलैंड इंस्टिट्यूट फॉर रेडियो एस्ट्रोनॉमी, द यूनिवर्सिटी ऑफ़ सिडनी, यूनिवर्सिटी ऑफ़ एडिनबर्ग, यूनिवर्सिटी ऑफ़ शेफील्ड तथा यूनिवर्सिटी ऑफ़ न्यू साउथ वेल्स के वैज्ञानिक शामिल थे.

वैज्ञानिकों का मानना है कि एपेप एक धूल भरा गुबार है जो अन्य सुपरनोवा की तुलना में अधिक धीमा है. यह तारामंडल पृथ्वी से 8,000 प्रकाश वर्ष दूर है लेकिन इसका धीमी गति से घूमना वैज्ञानिकों को सितारों के अस्तित्व के समाप्त होने पर पुनः विचार करने का अवसर देगा. वैज्ञानिकों का मानना है कि जितनी इसकी चमक है उसको देखते हुए यह बात चौंकाने वाली है कि अब तक इसके बारे में पता क्यों नहीं चला.

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