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05 November 2018

राष्ट्रीय आयुर्वेद दिवस

आयुष मंत्रालय प्रत्‍येक वर्ष धनवंतरी जयंती के अवसर पर आयुर्वेद दिवस मनाता है. इस बार आयुर्वेद दिवस 05 नवंबर 2018 को मनाया गया. इस उपलक्ष्‍य में आयुष मंत्रालय, नीति आयोग के साथ मिलकर 04 नवंबर और 05 नवंबर 2018 को नई दिल्‍ली में आयुर्वेद में उद्यमिता और व्‍यापार विकास पर एक संगोष्‍ठी का आयोजन किया है. इसका उद्देश्‍य आयुर्वेद क्षेत्र से जुड़े हितधारकों और उद्यमियों को कारोबार के नए अवसरों के प्रति जागरूक करना है. यह संगोष्‍ठी आयुर्वेद उत्‍पादों की बाजार हिस्‍सेदारी 2022 तक तीन गुना करने के आयुष मंत्रालय द्वारा तय किए गए बड़े लक्ष्‍य की दिशा में उठाया गया एक कदम है.

तीसरे आयुर्वेद दिवस के अवसर पर 05 नवंबर को आयुष स्‍वास्‍थ्‍य प्रणाली का इलेक्‍ट्रोनिक माध्‍यम से रिकॉर्ड रखने के लिए आयुष-स्‍वास्‍थ्‍य प्रबंधन सूचना प्रणाली (ए-एचएमआईएस) के नाम से एक समर्पित सॉफ्टवेयर एप्लिकेशन लांच किया गया. इसे शुरूआती चरण में देश के विभिन्‍न हिस्‍सों में 15 आयुष इकाइयों में शुरू किया जाएगा. इससे आयुर्वेद, योग, यूनानी, सिद्ध और होम्‍योपैथी चिकित्‍सा के तरीकों में आधुनिक प्रौद्योगिकी का इस्‍तेमाल कर और प्रभावी बनाया जा सकेगा. आयुर्वेद क्षेत्र के जानेमाने वैद्यों को इस दिन ‘राष्‍ट्रीय धनवंतरी आयुर्वेद पुरस्‍कार’ से सम्‍मानित किया गया. पुरस्‍कार में एक प्रशस्ति पत्र, धनवंतरी की प्रतिमा वाली ट्राफी और पांच लाख रूपये नकद दिए गए. 

राष्ट्रीय आयुर्वेद दिवस (National Ayurveda Day) हर साल धन्वंतरी जयंती या धनतेरस (Dhanteras) के दिन मनाया जाता है. राष्ट्रीय आयुर्वेद दिवस (National Ayurveda Day) की शुरुआत साल 2016 में हुई थी. पहला आयुर्वेद दिवस (Ayurveda Day) 28 अक्टूबर 2016 को धनतेरस के दिन मनाया गया था. इस साल देश तीसरा आयुर्वेद दिवस मना रहा है. बता दें कि आयुर्वेद सालों से हमारे अच्छे स्वास्थ्य में अपनी भूमिका निभाता आ रहा है. ऐसे में आयुर्वेद को बढ़ावा देने के लिए राष्ट्रीय आयुर्वेद दिवस मनाया जाता है. राष्ट्रीय आयुर्वेद दिवस (National Ayurveda Day) हर साल धनतेरस के दिन मनाया जाता है. भगवान धन्वंतरी (Dhanvantari) को आयुर्वेद और आरोग्य का देवता माना जाता है. मान्यताओं के अनुसार भगवान धन्वंतरी की उत्पत्ति समुद्र मंथन के दौरान हुई थी. समुद्र मंथन से निकले भगवान धन्वंतरी के हाथों में कलश था. इसी वजह से दिवाली के दो दिन पहले भगवान धन्वंतरी के जन्मदिन को धनतेरस (Dhanteras) के रूप में मनाया जाता है. ऐसे में आयुर्वेद के देवता कहे जाने वाले भगवान धन्वंतरी के जन्मदिन यानी धनतेरस के दिन राष्ट्रीय आयुर्वेद दिवस मनाया जाता है.

भगवान धन्वंतरी (Dhanvantari) को भगवान विष्णु का रूप कहते हैं जिनकी चार भुजायें हैं. उपर की दोंनों भुजाओं में शंख और चक्र धारण किये हुये हैं. जबकि दो अन्य भुजाओं मे से एक में जलूका और औषध तथा दूसरे मे अमृत कलश लिये हुये हैं. इनका प्रिय धातु पीतल माना जाता है. इसीलिये धनतेरस को पीतल आदि के बर्तन खरीदने की परंपरा भी है. इन्‍हे आयुर्वेद की चिकित्सा करनें वाले वैद्य आरोग्य का देवता कहते हैं. इन्होंने ही अमृतमय औषधियों की खोज की थी.

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