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24 November 2018

कैबिनेट ने भारतीय सहयोगी एवं स्वास्थ्य सेवा परिषद के गठन को मंजूरी दी

प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी की अध्यक्षता में केन्द्रीय मंत्रिमंडल ने सहयोगी एवं स्वास्थ्य सेवा प्रोफेशनलों द्वारा दी जाने वाली शिक्षा एवं सेवाओं के नियमन और मानकीकरण के लिए सहयोगी एवं स्वास्थ्य सेवा पेशा विधेयक, 2018 को मंजूरी दे दी है. इस विधेयक में एक भारतीय सहयोगी एवं स्वास्थ्य सेवा परिषद और संबंधित राज्य सहयोगी एवं स्वास्थ्य सेवा परिषदों के गठन का प्रावधान किया गया है, जो सहयोगी एवं स्वास्थ्य सेवा पेशों के लिए एक मानक निर्धारक और सुविधाप्रदाता की भूमिका निभाएंगी. एक केन्द्रीय एवं संबंधित राज्य सहयोगी एवं स्वास्थ्य सेवा परिषदों का गठन किया जाएगा; सहयोगी एवं स्वास्थ्य सेवाओं से जुड़े विषयों में 53 पेशों सहित 15 प्रमुख प्रोफेशनल श्रेणियां होंगी. विधेयक में केन्द्रीय परिषद और राज्य परिषदों की संरचना, गठन, स्वरूप एवं कार्यकलापों का उल्लेख किया गया है जैसे कि नीतियां एवं मानक तैयार करना, प्रोफेशनल आचरण का नियमन, लाइव रजिस्टरों का सृजन एवं रखरखाव, कॉमन एंट्री एवं एक्जिट परीक्षाओं के लिए प्रावधान इत्यादि. 

केन्द्रीय परिषद में 47 सदस्य होंगे जिनमें से 14 सदस्य पदेन होंगे, जो विविध एवं संबंधित भूमिकाओं और कार्यकलापों का प्रतिनिधित्व करेंगे, जबकि शेष 33 सदस्य गैर-पदेन होंगे जो मुख्यत: 15 प्रोफेशनल श्रेणियों का प्रतिनिधित्व करेंगे. राज्य परिषदों की परिकल्पना केन्द्रीय परिषद को प्रतिबिंबित करने के रूप में भी की गई है, जिसमें 7 पदेन सदस्य और 21 गैर-पदेन सदस्य होंगे. गैर-पदेन सदस्यों में से ही इसके अध्यक्ष का निर्वाचन किया जाएगा. केन्द्रीय एवं राज्य परिषदों के अधीनस्थ प्रोफेशनल सलाहकार निकाय विभिन्न मुद्दों पर स्वतंत्र ढंग से गौर करेंगे और विशिष्ट मान्यता प्राप्त श्रेणियों से संबंधित सिफारिशें पेश करेंगे. इस विधेयक को दायरे में आने वाले किसी भी पेशे से जुड़े किसी भी अन्य मौजूदा कानून से ऊपर माना जाएगा. राज्य परिषद सहयोगी एवं स्वास्थ्य सेवा संस्थानों को मान्यता देने का कार्य करेगी. कदाचार की रोकथाम के लिए विधेयक में अपराधों एवं जुर्माने से जुड़े अनुच्छेद को शामिल किया गया है. विधेयक के तहत केन्द्र एवं राज्य सरकारों को भी नियम बनाने का अधिकार दिया गया है. नियम-कायदे बनाने और कोई अनुसूची जोड़ने अथवा किसी अनुसूची में संशोधन करने के लिए केन्द्र सरकार को भी परिषद को निर्देश देने का अधिकार दिया गया है.

अधिनियम पारित होने के 6 माह के भीतर एक अंतरिम परिषद का गठन किया जाएगा, जो केन्द्रीय परिषद का गठन होने तक दो वर्षों की अवधि के लिए प्रभार संभालेगी. केन्द्र एवं राज्यों में परिषद का गठन कॉरपोरेट निकाय के रूप में किया जाएगा जिसके तहत विभिन्न स्रोतों से धनराशि प्राप्त करने का प्रावधान होगा. आवश्यकता पड़ने पर परिषदों की सहायता क्रमश: केन्द्र एवं राज्य सरकारों द्वारा भी अनुदान सहायता के जरिए की जाएगी. हालांकि, यदि राज्य सरकार असमर्थता जताती है तो वैसी स्थिति में केन्द्र सरकार आरंभिक वर्षों के लिए राज्य परिषद को कुछ अनुदान जारी कर सकती है.

परिषद के गठन की तिथि से लेकर अगले कुछ वर्षों के दौरान सभी मौजूदा सहयोगी एवं स्वास्थ्य सेवा प्रोफेशनल इससे जुड़ेंगे. आयुष्मान भारत के विजन अनुरूप उच्च गुणवत्ता वाली विविध स्वास्थ्य सेवाएं सुलभ हो पाएंगी, जिससे ‘डॉक्टर आधारित’ मॉडल के बजाय ‘सुगम्य सेवा एवं टीम आधारित’ मॉडल की ओर अग्रसर होना संभव हो पाएगा. यह अनुमान लगाया गया है कि सहयोगी एवं स्वास्थ्य सेवा पेशा विधेयक, 2018 से देश में सीधे तौर पर लगभग 8-9 लाख मौजूदा सहयोगी एवं स्वास्थ्य सेवा संबंधी प्रोफेशनल और हर वर्ष कार्यबल में बड़ी संख्या में शामिल होने वाले एवं स्वास्थ्य प्रणाली में अहम योगदान देने वाले अन्य स्नातक प्रोफेशनल लाभान्वित होंगे. हालांकि, इस विधेयक का उद्देश्य मुहैया कराई जाने वाली स्वास्थ्य सेवाओं से जुड़ी प्रणाली को सुदृढ़ बनाना है, इसलिए यह कहा जा सकता है कि इस विधेयक से देश की पूरी आबादी और समग्र रूप से समूचा स्वास्थ्य सेवा क्षेत्र लाभान्वित होगा.

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