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23 November 2018

पाकिस्तान की मशहूर शायरा व लेखिका फहमीदा रियाज़ का निधन

पाकिस्तान की मशहूर शायरा और मानवाधिकार कार्यकर्ता फहमीदा रियाज का गुरुवार को लंबी बीमारी के बाद 73 साल की उम्र में निधन हो गया. लोकतंत्र और स्त्री अधिकारों की तरक्कीपसंद आवाज के रूप में पाकिस्तान और भारत समेत पूरी दुनिया में उन्होंने अपनी पहचान बनाई थी. रियाज ने ताउम्र हर तरह की कट्टरता और तानाशाही का विरोध किया. इस कारण उन्हें अपने देश में भारी विरोध और मुकदमे तक झेलने पड़े. निर्वासित भी होना पड़ा. लेकिन उन्होंने हमेशा उदारता और इंसानियत की तरफदारी की और अपने विचारों को बेबाकी से पेश किया. रियाज का जन्म उत्तर प्रदेश के मेरठ में हुआ था. परिवार का माहौल साहित्यिक था, जिसका उन पर काफी असर पड़ा. पिता रियाजउद्दीन मशहूर शिक्षाशास्त्री थे, जिनका तबादला सिंध प्रांत में होने के बाद परिवार हैदराबाद (पाकिस्तान) जा बसा. वह महज चार साल की थीं, जब पिता गुजर गए. मां हुस्ना बेगम ने पाला-पोषा. पढ़ाई पूरी करने के बाद शादी हुई जो जल्दी ही टूट गई. बाद में वामपंथी कार्यकर्ता जफर अली उजान से दूसरी शादी हुई. पहली शादी से एक बेटी है, जबकि दूसरी शादी से दो बच्चे हुए.

रियाज ने युवावस्था में ही लिखना शुरू कर दिया था. पढ़ाई पूरी करने के बाद उन्होंने रेडियो पाकिस्तान और बीबीसी उर्दू में काम किया. कराची की एक विज्ञापन एजेंसी में भी काम किया. इसके बाद ‘आवाज’ नाम से एक उर्दू पत्रिका निकाली. आवाज के बेबाक तेवर ने जनरल जिया उल हक सरकार का ध्यान खींचा, जिसके बाद रियाज और उनके पति पर 10 से ज्यादा मुकदमे दर्ज हुए. पत्रिका बंद कर दी गई. पति को जेल हुई. एक प्रशंसक ने रियाज का जमानत लेकर उन्हें जेल जाने से बचाया. उसी समय वह अपने दोनों बच्चों और बहन के साथ भारत आ गईं. रिहा होने के बाद पति भी भारत आ गए. रियाज दिल्ली को अपना दूसरा घर मानती थीं. पाकिस्तान से निर्वासित होने के बाद उनका परिवार सात साल तक दिल्ली में रहा और जनरल जिया की मौत के बाद पाकिस्तान लौटा. भारत में रहने के दौरान रियाज ने दिल्ली के जामिया विश्वविद्यालय में रहकर हिंदी पढ़ना सीखा. 

पाकिस्तान वापस लौटने के बाद रियाज बेनजीर भुट्टो सरकार में सांस्कृतिक मंत्रालय से जुड़ीं. उन्हें नेशनल बुक फाउंडेशन का प्रबंध निदेशक बनाया गया. भुट्टो के बाद जब नवाज शरीफ सत्ता में आए तब रियाज को ‘भारत की एजेंट’ कहा गया. उन्हें धमकियां दी गईं. बेनजीर के दोबारा सत्ता में आने के बाद रियाज को कायदे आजम एकेडमी में नियुक्ति मिली. लेकिन बेनजीर के जाने के बाद वह फिर मुश्किल में घिर गईं. 2007 में बेटे कबीर की डूबने मौत हो गई. इसके कुछ समय बाद उन्हें उर्दू डिक्शनरी बोर्ड का प्रबंध निदेशक बनाया गया. रियाज को भले ही पाकिस्तान में भारत का एजेंट कहा गया, लेकिन उन्होंने भारत में भी सांप्रदायिक और कट्टरपंथ का विरोध किया. भारत को लेकर उनकी मशहूर नज्म ‘तुम बिल्कुल हम जैसे निकले’ इसकी मिसाल है. 

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