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08 November 2018

परमाणु पनडुब्बी अरिहंत ने पहला गश्ती अभियान सफलतापूर्वक पूरा किया

भारत की सामरिक परमाणु पनडुब्बी अर्थात् न्यूक्लियर पनडुब्बी आईएनएस अरिहंत ने 05 नवंबर 2018 को अपना पहला गश्ती अभियान सफलतापूर्वक पूरा कर लिया है. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इस मौके पर न्यूक्लियर पनडुब्बी आईएनएस अरिहन्त के अधिकारियों और कर्मियों से मुलाकात की. पीएम ने इस अवसर पर कहा की इस प्रोजेक्ट में शामिल आईएनएस अरिहंत के क्रू मेंबर्स समेत सभी लोगों को मैं धन्यवाद देता हूं. यह दिन इतिहास में हमेशा याद रखा जाएगा. आईएनएस अरिहंत के एटमी हथियारों से लैस होने के बाद भारत जमीन और हवा के साथ-साथ परमाणु हमला करने में सक्षम हो गया है. अब तक यह क्षमता सिर्फ अमेरिका और रूस के पास थी, अब तीसरे हम हैं. इस युग में ऐसे परमाणु हथियार की हर वक्त जरूरत होती है. आईएनएस अरिहंत को ऐसे इलाकों में तैनात किया जाएगा, जहां से दुश्मन परमाणु हमला करने की धमकी देता है. 6 हजार टन की आईएनएस अरिहंत को कई साल से पीएम मोदी की देखरेख में तैयार किया जा रहा था.

अरिहंत का जलावतरण पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह और उनकी पत्नी गुरशरण कौर द्वारा 26 जुलाई 2009 को जलावतरण किया गया. यह दिन इसलिए भी चुना गया क्योंकि यह कारगिल युद्ध में विजय की सालगिरह भी थी और इस दिन को कारगिल विजय दिवस या विजय दिवस) रूप में मनाया जाता है. भारत, अमेरिका, फ्रांस, रूस, ब्रिटेन और चीन के बाद छठा ऐसा देश हो गया है, जिसने अपनी परमाणु पनडुब्बी बनाने में कामयाबी हासिल की है. एटमी हथियारों से लैस पनडुब्बी काफी महत्वपूर्ण हथियार है. यह पनडुब्बी समुद्र के किसी भी कोने से शहर को बर्बाद करने की क्षमता वाली मिसाइल छोड़ सकती है. साथ ही, इसकी काफी जल्दी डिटेक्ट भी नहीं किया जा सकता. ऐसे में आईएनएस अरिहंत दुश्मन देश के तटीय इलाके के करीब जाकर उन इलाकों पर हमला कर सकती है, जहां जमीन से छोड़ी जाने वाली मध्यम दूरी मिसाइलें आसानी से नहीं पहुंच पातीं.

अमेरिका 70 से ज्यादा परमाणु पनडुब्बियों के साथ पहले नंबर पर है, जबकि 30 पनडुब्बियों के साथ रूस दूसरे नंबर पर है. इंग्लैंड के पास 12 और फ्रांस के पास 12 पनडुब्बियां हैं. चीन, अमेरिका और रूस की पनडुब्बियां 5000 किलोमीटर तक मारक क्षमता वाली हैं, वहीं आईएनएस अरिहंत की क्षमता 750 से 3500 किलोमीटर तक की है. परमाणु पनडुब्बी के निर्माण लिए भारत का प्रयास 1970 में शुरू हुआ था. जबकि इस क्षेत्र में भारत को 90 के दशक में सफलता हासिल हुई. आईएनएस अरिहंत को पहली बार साल 2009 में विशाखापत्नम में शिप बिल्डिंग सेंटर में लॉन्च किया गया था. अगस्त 2018 में इसे भारतीय नौसेना में सेवा के लिए सौंप दिया गया.

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