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07 November 2018

आईआईटी मद्रास ने भारत का पहला स्वदेशी माइक्रोप्रोसेसर ‘शक्ति’ तैयार किया

भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान, मद्रास ने भारत का पहला स्वदेशी माइक्रोप्रोसेसर विकसित और डिजाईन किया है. इस माइक्रोप्रोसेसर को ‘शक्ति’ नाम दिया गया है. इंडियन स्पेस रिसर्च ऑर्गनाइजेशन, चंडीगढ़ की सेमी कंडक्टर लैब में माइक्रोचिप के साथ इसे बनाया गया है. इससे आयात की गई माइक्रो चिप पर निर्भरता कम होगी. साथ ही इन माइक्रो चिप की वजह से होने वाले साइबर अटैक का खतरा भी कम होगा. आईआईटीएम की राइज लैब के लीड रिसर्चर प्रफेसर कामकोटी वीजीनाथन का कहना है कि वर्तमान डिजिटल इंडिया में बहुत सारी एप्स को कस्टमाइज्ड प्रोसेसर कोर की आवश्यकता रहती है. हमारे नए डिजाइन के साथ ये सभी चीजें काफी आसान हो जाएंगी. सभी कंप्यूटिंग और इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों का मस्तिष्क ऐसे कई माइक्रोप्रोसेसरों से जुड़ा है, जो उच्च गति प्रणालियों और सुपर कंप्यूटरों को संचालित करने के लिए उपयोग किए जाते हैं.
 
जुलाई में आईआईटी मद्रास के शुरुआती बैच ने 300 चिप डिजाइन की थी, जिन्हें अमेरिका के ऑरेगन में इंटेल की फैसिलिटी में जोड़ा गया था. अब यह देश में ही तैयार किया गया माइक्रो प्रोसेसर पूरी तरह भारतीय है. हालांकि प्रोफेसर ने कहा कि तकनीक पूरी तरह से अलग है. भारत में बना माइक्रोप्रोसेसर 180 एनएम का है, जबकि अमेरिका में बना प्रोसेसर 20 एनएम का है. इस माइक्रोप्रोसेसर ने भारत में पहले ही तहलका मचा दिया है. आईआईटी मद्रास इसे लेकर 13 कंपनियों के संपर्क में है. अब टीम 'पराशक्ति' के साथ तैयार है, जो सुपर कम्प्यूटर में इस्तेमाल होने वाला अडवांस्ड माइक्रोप्रोसेसर है. यह सुपर स्केल प्रोसेसर दिसंबर 2018 तक तैयार हो जाएगा.

माइक्रोप्रोसेसर एक ऐसी डिजिटल इलेक्ट्रॉनिक युक्ति है जिसमें लाखों ट्रांजिस्टरों को एकीकृत परिपथ (इंटीग्रेटेड सर्किट या आईसी) के रूप में प्रयोग कर तैयार किया जाता है. इससे कंप्यूटर के केन्द्रीय प्रक्रमण इकाई (सीपीयू) की तरह भी काम लिया जाता है. इंटीग्रेटेड सर्किट के आविष्कार से ही आगे चलकर माइक्रोप्रोसेसर के निर्माण का रास्ता खुला था. माइक्रोप्रोसेसर के अस्तित्व में आने के पूर्व सीपीयू अलग-अलग इलेक्ट्रॉनिक अवयवों को जोड़कर बनाए जाते थे या फिर लघुस्तरीय एकीकरण वाले परिपथों से. सबसे पहला माइक्रोप्रोसेसर 1970 में बना था.

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