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24 November 2018

भारत और ऑस्ट्रेलिया के मध्य पांच समझौतों पर हस्ताक्षर

आपसी संबंधों को मजबूत करने और निवेश को बढ़ावा देने के लिए भारत और ऑस्ट्रेलिया ने 22 नवंबर 2018 को एग्रीकल्चरल रिसर्च (कृषि शोध) और शिक्षा जैसे क्षेत्रों में पांच समझौतों पर हस्ताक्षर किए. राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद और ऑस्ट्रेलियाई प्रधानमंत्री स्कॉट मॉरीसन की सिडनी में द्विपक्षीय मुद्दों पर चर्चा के बाद इन समझौतों पर हस्ताक्षर किए गए. राष्ट्रपति कोविंद ऑस्ट्रेलिया की तीन दिन की यात्रा पर हैं. राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद ने अपनी ऑस्ट्रेलिया यात्रा के दौरान प्रधानमंत्री स्कॉट मॉरीसन से सिडनी में मुलाकात की. ऑस्ट्रेलिया की यात्रा करने वाले वे पहले भारतीय राष्ट्रपति हैं. वे 21 नवंबर 2018 को सिडनी पहुंचे. अपनी दो देशों की यात्रा के दौरान वे पहले वियतनाम गए और वहां से ऑस्ट्रेलिया पहुंचे.

राष्ट्रपति की यात्रा के दौरान कृषि शोध, शिक्षा और अशक्तता जैसे क्षेत्रों में सहयोग और निवेश बढ़ाने के लिए पांच समझौतों पर हस्ताक्षर किए गए. पहला समझौता अशक्तता क्षेत्र में सहयोग और असमर्थ लोगों के लिए सेवाओं को बेहतर बनाने के लिए किया गया. दूसरा समझौता दोनों देशों के बीच व्यापार में द्विपक्षीय निवेश बढ़ाने के लिए इन्वेस्ट इंडिया और ऑस्ट्रेड के बीच हुआ है. तीसरा समझौता रांची स्थित केंद्रीय खनन योजना एवं डिजाइन संस्थान और कैनबरा स्थित कॉमनवेल्थ साइंटिफिक एंड रिसर्च ऑर्गेनाइजेशन के बीच आपसी सहयोग बढ़ाने के लिए किया गया है. गुंटूर स्थित आचार्य एन.जी. रंगा कृषि विश्वविद्यालय और पर्थ की यूनिवर्सिटी ऑफ वेस्टर्न ऑस्ट्रेलिया के बीच कृषि शोध में सहयोग बढ़ाने के लिए चौथा समझौता हुआ है. पांचवां और आखिरी समझौता दिल्ली के इंद्रप्रस्थ सूचना प्रौद्योगिकी संस्थान और ब्रिसबेन स्थित क्वींसलैंड प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय के बीच संयुक्त पीएचडी के लिए हुआ है.

सिडनी में ऑस्ट्रेलियाई उद्यमियों को संबोधित करते हुए राष्ट्रपति कोविंद ने कहा कि भारत में उनका निवेश कहीं नजर नहीं आता. उन्होंने उद्यमियों से कहा है कि भारत के वित्त, लॉजिस्टिक, औद्योगिक डिजाइन, बायोटेक, पूंजी बाजार, कृषि, खाद्य एवं अंतरिक्ष प्रौद्योगिकी के क्षेत्र में आपसी सहयोग मजबूत कर दोनों देश इसका लाभ उठा सकते हैं. राष्ट्रपति कोविंद ने सिडनी में राष्ट्रपिता महात्मा गांधी की कांसे की प्रतिमा का अनावरण किया. इस मौके पर उन्होंने कहा कि आपसी संघर्ष के इस दौर में महात्मा गांधी की अहिंसा और शांतिपूर्ण सह-अस्तित्व का संदेश और भी प्रासंगिक हो गया है. राष्ट्रपति ने कहा कि दुनिया की महान हस्ती की प्रतिमा का अनावरण करना उनके लिए गर्व की बात है.

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