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24 November 2018

राज्यपाल सत्यपाल मलिक ने भंग की जम्मू-कश्मीर विधानसभा

जम्मू-कश्मीर((Jammu and Kashmir ) में गठबंधन के जरिए सरकार बनाने के लिए दो पार्टियों की ओर से दावा ठोके जाने के बाद राज्यपाल सत्यपाल मलिक ने बुधवार को विधानसभा ही भंग कर दिया. PDP नेता महबूबा मुफ्ती (Mehbooba Mufti) ने विरोधी नेशनल कांफ्रेंस और कांग्रेस के साथ मिलकर सरकार बनाने का दावा पेश किया तो उधर दो विधायकों वाली पीपुल्स कांफ्रेंस मुखिया सज्जाद लोन  (Sajad Lone) ने भी बीजेपी (BJP) और अन्य विधायकों के समर्थन की बात कहकर राज्यपाल के सामने दावेदारी कर दी. राज्यपाल सत्यपाल मलिक (Satya Pal Malik) ने सरकार बनाने के लिए विधायकों की खरीद-फरोख्त की आशंका जताते हुए विधानसभा भंग कर दी. जम्मू-कश्मीर विधानसभा में कुल 89 सीटे हैं, जिनमें से दो सदस्य मनोनीत किए जाते हैं. ऐसी स्थिति में सरकार बनाने के लिए 44 विधायकों की जरूरत होती है. मौजूदा स्थिति में पीपुल्स डेमोक्रेटिक पार्टी (पीडीपी) के पास 28, बीजेपी के 25 और नेशनल कॉन्फ्रेंस के पास 15 और कांग्रेस के पास 12 सीटे हैं.

राजभवन ने राज्यपाल की तरफ से एक बयान जारी कर कहा कि जम्मू-कश्मीर में स्थिरता व सुरक्षा का माहौल बनाने और स्पष्ट बहुमत वाली सरकार के गठन के लिए उचित समय पर चुनाव कराने के इरादे से ही मौजूदा विधानसभा को भंग किया गया है. राज्यपाल ने कहा कि बहुमत के लिए सभी पक्षों की ओर से अलग अलग दावें हैं वहां ऐसी व्यवस्था की उम्र कितनी लंबी होगी इस पर भी संदेह है. गठबंधन में शामिल कुछ दल विधानसभा भंग करने की मांग करते थे. इसके अतिरिक्त पिछले कुछ वर्षों का अनुभव यह बताता है कि खंडित जनादेश से स्थाई सरकार बनाना संभव नहीं है. ऐसी पार्टियों का साथ आना जिम्मेदार सरकार बनाने की बजाए सत्ता हासिल करने का प्रयास है. व्यापक खरीद फरोख्त होने और सरकार बनाने के लिए बेहद अलग राजनीतिक विचारधाराओं के विधायकों का समर्थन हासिल करने के लिए धन के लेन देन होने की आशंका हैं. ऐसी गतिविधियां लोकतंत्र के लिए हानिकारक हैं और राजनीतिक प्रक्रिया को दूषित करती हैं.

वर्ष 2015 में राज्य में बीजेपी और पीडीपी ने मिलकर सरकार बनाई थी. जम्मू-कश्मीर में 16 जून 2018 को भाजपा के समर्थन वापस लेने से मुख्यमंत्री महबूबा मुफ्ती के नेतृत्व वाली पीडीपी-भाजपा गठबंधन सरकार गिर गई थी. इसके बाद से ही राज्यपाल शासन लागू है. सरकार का गठन न होने की स्थिति में 19 दिसंबर 2018 को राज्यपाल शासन के छह माह पूरे होते ही राज्य में राष्ट्रपति शासन लागू हो जाता, क्योंकि राज्य संविधान के मुताबिक जम्मू-कश्मीर में छह माह से ज्यादा समय तक राज्यपाल शासन लागू नहीं रखा जा सकता.

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