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19 November 2018

आंध्र प्रदेश ने विभाजन के चार वर्ष बाद राजकीय चिन्ह स्वीकार किया

आंध्र प्रदेश के विभाजन के करीब चार वर्षों बाद राज्य ने आधिकारिक उपयोग के लिए अपने नए राज्य चिह्न को स्वीकार कर लिया है. आंध्र प्रदेश सरकार द्वारा जारी जानकारी में बताया गया कि यह चिह्न अमरावती कला से प्रेरित है और इसमें हरे, लाल व पीले रंग का उपयोग हुआ है. इसके अलावा राज्य चिह्न के नीचे राष्ट्रीय चिह्न को भी जगह दी गई है. आंध्र प्रदेश का राजकीय प्रतीक अमरावती स्कूल ऑफ आर्ट से प्रेरित है. इसमें 'धम्म चक्र', शामिल है जो बौद्ध प्रतीक के साथ सजाया जाता है जिसमें पिनाट पत्तियों और कीमती पत्थरों के साथ बनाया जाता है. सजावटी मोतियों को तीन चक्रों में आरोही क्रम में लगाया गया है. आंतरिक चक्र में 48, बीच में 118 और बाहरी चक्र में 148 मोती लगाए गये हैं. ‘पंमा घाटक' अथवा 'फूलदान' 'धम्म चक्र' के केंद्र में है. इसके मुख्य आवरण पर मेडलियन और टैसल के साथ चार बैंड वाली माला के साथ सजाया गया है.

राज्य सरकार द्वारा काले हिरन (ब्लैक बक), जिसे स्थानीय कृष्णा जिंका भी कहा जाता है, को राजकीय पशु यथावत रखा गया है. नीम आंध्र प्रदेश का राजकीय पेड़ है तथा रोज़ रिंग्ड पैराकीट राज्य का राजकीय पक्षी है. आंध्र प्रदेश के बंटवारे के बाद वॉटर लिली की राजकीय फूल के रूप में मान्यता समाप्त कर दी गई थी उसके स्थान पर चमेली को राजकीय फूल घोषित किया गया.

भारत का राजकीय चिन्ह: अशोक चिह्न भारत का राजकीय प्रतीक है. इसको सारनाथ में मिली अशोक लाट से लिया गया है. मूल रूप इसमें चार शेर हैं जो चारों दिशाओं की ओर मुंह किए खड़े हैं. इसके नीचे एक गोल आधार है जिस पर एक हाथी, दौड़ता घोड़ा, एक सांड़ और एक सिंह बने हैं. ये गोलाकार आधार खिले हुए उल्टे लटके कमल के रूप में है. हर पशु के बीच में एक धर्म चक्र बना हुआ है. राष्ट्र के प्रतीक में जिसे 26 जनवरी 1950 में भारत सरकार द्वारा अपनाया गया था केवल तीन सिंह दिखाई देते हैं और चौथा छिपा हुआ है, दिखाई नहीं देता है. चक्र केंद्र में दिखाई देता है, सांड दाहिनी ओर और घोड़ा बायीं ओर और अन्य चक्र की बाहरी रेखा बिल्कुल दाहिने और बाई छोर पर दिखाई देते हैं. प्रतीक के नीचे सत्यमेव जयते देवनागरी लिपि में अंकित है. यह शब्द सत्यमेव जयते शब्द मुंडकोपनिषद से लिए गए हैं, जिसका अर्थ है सत्य की सदा विजय होती है.

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