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20 December 2018

ग्लोबल जेंडर गैप इंडेक्स में भारत 108वें स्थान पर, आइसलैंड शीर्ष पर

 वर्ल्ड इकोनॉमिक फोरम (WEF) की वर्ष 2018 की लैंगिक असमानता (Gender Gap) रिपोर्ट में भारत को 108वां स्थान प्राप्त हुआ है. वर्ल्ड इकोनॉमिक फोरम द्वारा यह रिपोर्ट 18 दिसंबर 2018 को जिनेवा, स्विट्ज़रलैंड में जारी की गई जिसमें विश्व के विभिन्न देशों पर अध्ययन किया गया है. रिपोर्ट के आंकड़ों में कहा गया है कि महिलाएं हर क्षेत्र में उम्दा कार्य कर रही हैं लेकिन अवसरों की समानता अभी भी मौजूद नहीं है. रिपोर्ट के अनुसार कार्यक्षेत्र में महिलाओं और पुरुषों के बीच समानता लाने में 202 वर्ष लग जायेंगे. वर्ल्ड इकोनॉमिक फोरम की जेंडर गैप इंडेक्स रिपोर्ट में कहा गया है कि
दुनिया लैंगिक असमानता की खाई को 68 प्रतिशत पाट चुकी है लेकिन फिर भी महिला-पुरुष समानता के लिए 202 वर्ष लग सकते हैं. भारत के मामले में लैंगिक असमानता 66 प्रतिशत तक है, जबकि पूरे दक्षिण एशिया की बात करें तो यह 65 प्रतिशत पर है.

वर्ल्ड इकोनॉमिक फोरम की जेंडर गैप इंडेक्स रिपोर्ट को चार श्रेणियों में बांटा गया है जिसमें महिलाओं की आर्थिक भागीदारी और अवसर, शिक्षा का स्तर, स्वास्थ्य एवं जीवन प्रत्याशा तथा राजनीतिक सशक्तिकरण शामिल हैं. वर्ष 2018 की रिपोर्ट में कुल 149 देशों के इस सर्वे में भारत को 108वां स्थान मिला है. वर्ष 2017 में भी भारत का यही रैंक था, जबकि 2016 में वह 21 स्थान ऊपर 87वें स्थान पर था. वर्ष 2017 की रिपोर्ट में भारत की रैंकिंग में गिरावट के पीछे मुख्यत: राजनीतिक सशक्तिकरण, स्वस्थ जीवन प्रत्याशा और बुनियादी साक्षरता के क्षेत्रों में लैंगिक असमानता बढ़ने को ज़िम्मेदार ठहराया गया था. आर्थिक भागीदारी और अवसरों के मामले में भारत 2017 में 139वें स्थान पर था जबकि वर्ष 2018 में 142वें स्थान पर है. स्वास्थ्य और जीवन प्रत्याशा श्रेणी में भारत 147वें स्थान पर है. इस श्रेणी में भारत पिछले वर्ष 146वें स्थान पर था. राजनीतिक सशक्तिकरण के मामले में भारत का स्थान 19वां है, जबकि पिछले साथ वह 15वें नंबर पर था. शिक्षा के स्तर श्रेणी में भारत दो स्थान नीचे गिरकर 114वें नंबर पर आ गया है. पिछले वर्ष भारत 112वें स्थान पर था

 जेंडर गैप पर वर्ल्ड इकोनॉमिक फोरम द्वारा कुल 149 देशों पर किये गये सर्वेक्षण में पाकिस्तान का रैंक 148 है, जबकि सबसे नीचे 149वें स्थान पर गृहयुद्ध में फंसे देश यमन को रखा गया है. रिपोर्ट में दक्षिण एशियाई देशों के बीच बांग्लादेश 48वें स्थान के साथ सबसे अच्छी स्थिति में है. वर्ष 2017 में भी बांग्लादेश ही दक्षिण एशिया में लैंगिक असमानत रैंकिंग में सर्वश्रेष्ठ रहा था, पिछले वर्ष बांग्लादेश की रैंकिंग 47 थी. रिपोर्ट में श्रीलंका और नेपाल को क्रमश: 100वें और 105वें स्थान पर रखा गया है. मालदीव का रैंक 113, जबकि भूटान का 122 है. अफ़ग़ानिस्तान को इस सर्वे में शामिल नहीं किया गया है. पिछले सालों की भांति लगातार दसवें वर्ष भी आइसलैंड पहले नंबर पर है. दूसरे और तीसरे स्थान पर क्रमश: नॉर्वे और स्वीडन हैं.

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