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06 December 2018

इसरो के सबसे वजनी सैटेलाईट जीसैट-11 का सफल प्रक्षेपण किया

भारतीय अंतरिक्ष एजेंसी इसरो द्वारा बनाए ‘सबसे अधिक वजनी' उपग्रह जीसैट-11 का 5 दिसंबर को फ्रेंच गुआना के एरियानेस्पेस के एरियाने-5 रॉकेट से सफल प्रक्षेपण किया गया. भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो) ने बताया कि करीब 5,854 किलोग्राम वजन का जीसैट-11 देशभर में ब्रॉडबैंड सेवाएं उपलब्ध कराने में अहम भूमिका निभाएगा. बताया जा रहा है कि यह सैटेलाइट GSAT-11 इसरो का बनाया अब तक का ‘सबसे अधिक वजन' वाला उपग्रह है.

जीसैट-11 अगली पीढ़ी का ‘हाई थ्रुपुट' संचार उपग्रह है और इसका जीवनकाल 15 साल से अधिक का है. इसे पहले 25 मई को प्रक्षेपित किया जाना था लेकिन इसरो ने अतिरिक्त तकनीकी जांच का हवाला देते हुए इसके प्रक्षेपण का कार्यक्रम बदल दिया. शुरुआत में उपग्रह भू-समतुल्यकालिक स्थानांतरण कक्षा में ले जाया जाएगा और उसके बाद उसे भू-स्थैतिक कक्षा में स्थापित किया जाएगा.  जीसैट-11 उपग्रह का वजन 5.8 टन है तथा इसकी कुल लागत 1117 करोड़ रुपये है. इसका प्रत्येक सौर पैनल 4 मीटर से भी बड़ा है तथा यह 11 किलोवाट ऊर्जा का उत्पादन करेगा. सैटेलाइट के सफल प्रक्षेपण से भारत के पास अपना स्वयं का सैटेलाइट आधारित इंटरनेट होगा. सैटेलाइट आधारित इंटरनेट से हाई स्पीड कनेक्टिविटी बढ़ जाएगी. 

इसे पहले 25 मई को प्रक्षेपित किया जाना था लेकिन इसरो ने अतिरिक्त तकनीकी जांच के कारण इसके प्रक्षेपण का कार्यक्रम बदल दिया था. जीसैट-11 को जियोस्टेशनरी कक्षा में 74 डिग्री पूर्वी देशांतर पर रखा जाएगा. उसके बाद उसके दो सौर एरेज और चार एंटिना रिफ्लेक्टर भी कक्षा में स्थापित किए जाएंगे. कक्षा में सभी परीक्षण पूरे होने के बाद उपग्रह काम करने लगेगा. जीसैट-11 भारत की मुख्य भूमि और द्वीपीय क्षेत्र में हाई-स्पीड डेटा सेवा मुहैया कराने में मददगार साबित होगा. उसमें के.यू. बैंड में 32 यूज़र बीम जबकि के.ए. बैंड में आठ हब बीम लगाए हैं.

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