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04 December 2018

ट्रेन-18 ने सफलतापूर्वक 180 किमी/घंटा की रफ़्तार पर ट्रायल रन पूरा किया

भारतीय रेलवे की पहली बिना इंजन वाली ट्रेन-18 परीक्षण के दौरान 180 किलोमीटर प्रति घंटे से अधिक स्पीड से सफलतापूर्वक दौड़ी. इस प्रकार यह देश की सबसे तेज दौड़ने वाली ट्रेन बन गई है. इस ट्रेन की अधिकतम स्पीड 220 किमी प्रति घंटे तक हो सकती है. इससे पहले भारतीय पटरियों पर टैल्गो ट्रेन 180 की स्पीड से दौड़ी थी, लेकिन वह स्पेन की ट्रेन थी. मौजूदा समय में भारत की सबसे तेज दौड़ने वाली ट्रेन गतिमान एक्सप्रेस दिल्ली से झांसी के बीच अधिकतम 160 किलोमीटर प्रति घंटे की स्पीड से सफर करती है.

अगर सबकुछ सही रहा तो ट्रेन 18 मौजूदा शताब्दी एक्सप्रेस की जगह लेगी. यह ट्रेन 200 किमी/घंटा की रफ्तार तक पहुंच सकती है. ट्रेन-18 चेन्नई की कोच फैक्ट्री में बनी है. मेक-इन-इंडिया के तहत शुरू हुई परियोजनाओं में से ये अहम है. भारत में इसके निर्माण से लागत घटी है. इसकी रफ्तार की वजह से यात्रा का समय 10-15% तक घट जाएगा. इसमें स्मार्ट ब्रेकिंग सिस्टम है. 16 कोच वाली इस ट्रेन में 2 विशेष कोच हैं. इनमें 360 डिग्री तक घूमने वाली सीटों का इस्तेमाल किया गया है. एयरोडायनैमिक डिजाइन वाले ड्राइवर केबिन ट्रेन के दोनों सिरों पर लगाए गए हैं, ताकि मंजिल तक पहुंचने के बाद ये तुरंत वापस लौट सकें. इसमें एडवांस ब्रेकिंग सिस्टम है, जिससे ऊर्जा की बचत होती है. 

आईसीएफ इस साल एक और ट्रेन 18 का निर्माण करेगा. अगले साल तक इस तरह की 4 और ट्रेनें बनाई जाएंगी. पूरी तरह से एयरकंडीशंड होने की वजह से ये यात्रियों को सुविधा और सुरक्षा मुहैया कराएंगी. सभी उपकरण बोगियों के नीचे लगाए गए हैं, ताकि यात्रियों को ज्यादा जगह मिल सके. ट्रेन-18 में जीपीएस आधारित यात्री सूचना प्रणाली के अलावा अलहदा तरह की लाइट, ऑटोमेटिक दरवाजे और सीसीटीवी कैमरे लगे होंगे. इस ट्रेन के मध्य में दो एक्जिक्यूटिव कंपार्टमेंट होंगे. प्रत्येक में 52 सीटें होंगी. वहीं सामान्य कोच में 78 सीटें होंगी.

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