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10 December 2018

कृषि निर्यात नीति 2018 को कैबिनेट की मंजूरी

केन्द्रीय मंत्रिमंडल ने 06 दिसंबर 2018 को कृषि क्षेत्र का निर्यात 2022 तक दोगुना कर 60 अरब डालर पर पहुंचाने के लक्ष्य को सामने रखते हुये कृषि निर्यात नीति को मंजूरी दे दी. वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री सुरेश प्रभु ने मंत्रिमंडल के निर्णय की जानकारी देते हुये कहा कि कृषि निर्यात नीति का मकसद क्षेत्र से चाय, काफी, चावल तथा अन्य जिंसों के निर्यात को बढ़ावा देना है. इससे वैश्विक कृषि व्यापार में भारत की हिस्सेदारी बढ़ाने में मदद मिलेगी. उन्होंने कहा की कृषि निर्यात नीति का लक्ष्य वर्ष 2022 तक देश का कृषि निर्यात दोगुना कर 60 अरब डालर तक पहुंचाना है. इस नीति में कृषि निर्यात से जुड़े सभी पहलुओं पर गौर किया गया है. इसमें ढांचागत सुविधाओं का आधुनिकीकरण, उत्पादों का मानकीकरण, नियमन को बेहतर बनाना, बिना सोचे फैसले फैसलों पर अंकुश और शोध एवं विकास गतिविधियों पर ध्यान दिया गया है. वाणिज्य मंत्री ने कहा कि नीति में जैविक उत्पादों के निर्यात पर लगे सभी तरह के प्रतिबंधों को हटाने पर भी जोर दिया गया है.

इस नीति में ढांचागत सुविधाओं का आधुनिकीकरण, उत्पादों का मानकीकरण, नियमन को बेहतर बनाना, बिना सोचे फैसले फैसलों पर अंकुश और शोध एवं विकास गतिविधियों पर ध्यान दिया गया है. नीति के तहत जैविक उत्पादों के निर्यात पर लगे सभी तरह के प्रतिबंधों को हटाने पर भी जोर दिया गया है. इस नीति के क्रियान्वयन में अनुमानित 1,400 करोड़ रुपये का वित्तीय प्रभाव होगा. प्याज जैसे घरेलू जरूरतों के कुछ प्रमुख कृषि उत्पादों को छोड़कर सभी जैविक और प्रसंस्कृत कृषि उत्पादों से निर्यात प्रतिबंध हटा लिया जाएगा. इस नीति में कृषि निर्यात से जुड़े सभी पहलुओं पर गौर किया गया है.

सरकार ने कृषि निर्यात दोगुना करने और भारतीय किसानों और कृषि उत्पादों को वैश्विक मूल्य श्रंखला से जोड़ने के मकसद से व्यापक कृषि निर्यात नीति बनाई है. इस नीति का मकसद अगले कुछ साल में 100 अरब डॉलर के निर्यात का लक्ष्य हासिल करना है. केंद्र सरकार पिछले कुछ समय से किसानों के निशाने पर है. किसानों के प्रति सरकार के खिलाफ काफी रोष पनप रहा है. लेकिन नर्इ पॉलिसी आने के बाद किसानों को काफी राहत मिलने के आसार हैं.

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