मासिक करेंट अफेयर्स

27 December 2018

निर्वाचन आयोग ने लोकसभा चुनाव 2019 के दौरान मतदान स्थलों पर सभी तरह के तंबाकू उत्पादों पर रोक लगायी

भारतीय निर्वाचन आयोग ने पहली बार लोकसभा चुनाव 2019 के दौरान सभी मतदान स्थलों पर सभी तरह के तंबाकू उत्पादों पर प्रतिबंध लगा दिया है. आयोग ने यह मुहिम देश में तंबाकू नियंत्रण कानून को प्रभावी तरीके से लागू करने के लिए शुरू की है. आयोग ने सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को दिशा-निर्देश जारी करते हुए जिला निर्वाचन अधिकारियों या जिला मजिस्ट्रेटों को नासिर्फ धूमपान पर पाबंदी लगाने को कहा है, बल्कि सभी मतदान स्थलों पर चबाने वाले तंबाकू पर भी पूर्ण प्रतिबंध लगाने का निर्देश दिया है.

चुनाव आयोग द्वारा जारी दिशा-निर्देशों के अनुसार, देश के सभी मतदान केंद्रों को सिर्फ धूम्रपान मुक्त नहीं बल्कि तम्बाकू मुक्त घोषित किया जाए. मतदान केंद्रों को नासिर्फ धूम्रपान मुक्त रखना होगा, साथ ही साथ बीड़ी, सिगरेट, गुटखा, सुगंधित तंबाकू पर पूर्ण प्रतिबंध रहेगा. इस संबंध में सभी मतदान स्थलों पर बड़े बैनरों पर यह दिशा-निर्देश लिखे होंगे. सभी मतदान स्थलों पर एक नोडल अफसर को बूथ को पूरी तरह से तंबाकू मुक्त रखने की जिम्मेदारी सौंपी जाएगी. सभी जिला तंबाकू नियंत्रण इकाइयां इस अभियान की निगरानी करेंगी. साथ ही मतदाताओं को तंबाकू के बुरे प्रभाव के बारे में बताएंगी.

आयोग ने यह कदम तब उठाया जब दिल्ली सरकार के स्वास्थ्य विभाग ने सभी मतदान स्थलों को तंबाकू मुक्त बनाने की अपील की. उल्लेखनीय है कि आयोग ने पिछले चुनाव में सभी मतदान स्थलों को धूमपान से मुक्त घोषित किया था. अतिरिक्त निदेशक (स्वास्थ्य) डा. एस के अरोड़ा ने एक पत्र में कहा था कि तंबाकू का उपयोग बीमारी और समय से पहले मृत्यु आदि के साथ ही स्वास्थ्य के लिए एक बड़ा खतरा है. उन्होंने कहा कि चुनाव के दिन, देश की वयस्क आबादी का एक बड़ा हिस्सा अपना वोट डालने के लिए मतदान केंद्रों पर जाता है. मतदान केंद्रों पर लोगों को तंबाकू के प्रभाव के बारे में अवगत कराने का यह बेहतरीन अवसर होगा.

भारतीय निर्वाचन आयोग: भारतीय निर्वाचन आयोग एक स्वायत्त एवं अर्ध-न्यायिक संस्थान है जिसका गठन भारत में स्वतंत्र एवं निष्पक्ष रूप से विभिन्न से भारत के प्रातिनिधिक संस्थानों में प्रतिनिधि चुनने के लिए गया था. भारतीय चुनाव आयोग की स्थापना 25 जनवरी 1950 को की गयी थी.आयोग में वर्तमान में एक मुख्य चुनाव आयुक्त और दो चुनाव आयुक्त होते हैं. मुख्य चुनाव आयुक्त और अन्य चुनाव आयुक्तों की नियुक्ति भारत का राष्ट्रपति करता है. मुख्य चुनाव आयुक्त का कार्यकाल 6 वर्ष या आयु 65 साल, जो पहले हो, का होता है जबकि अन्य चुनाव आयुक्तों का कार्यकाल 6 वर्ष या आयु 62 साल, जो पहले हो, का होता हैं. चुनाव आयुक्त का सम्मान और वेतन भारत के सर्वोच्च न्यायलय के न्यायधीश के सामान होता है. मुख्य चुनाव आयुक्त को संसद द्वारा महाभियोग के जरिए ही हटाया जा सकता हैं.

No comments:

Post a comment