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06 December 2018

रक्षा मंत्रालय ने 3,000 करोड़ रुपये की रक्षा खरीद को मंजूरी प्रदान की

रक्षा मंत्री निर्मला सीतारमन की अध्यक्षता में रक्षा अधिग्रहण परिषद (डीएसी) की 01 दिसंबर 2018 को बैठक हुई और इसमें 3,000 करोड़ रुपये के बराबर की रक्षा खरीद सेवाओं को मंजूरी दी गई. रक्षा अधिग्रहण परिषद ने रूस में प्राथमिक हथियार के रूप में रूस में दो भारतीय जहाजों के निर्माण के साथ ब्रह्मोस मिसाइलों सहित 3000 करोड़ रुपये की रक्षा खरीद को मंजूरी दे दी है. रक्षा मंत्रालय ने नौसेना के दो स्टेल्थ फ्रिगेट (रडार की नजर में पकड़ नहीं आने वाले युद्धपोतों) के लिये ब्रह्मोस सुपरसोनिक क्रूज मिसाइलें और सेना के मुख्य युद्धक टैंक ‘अर्जुन’ के लिये बख्तरबंद रिकवरी वाहन सहित 3,000 करोड़ रुपये मूल्य की सैन्य खरीद को मंजूरी दी हैं. 

भारत और रूस की ओर से मिलकर विकसित हो रहे ब्रह्मोस रॉकेट सिस्‍टम को दुनिया का सर्वश्रेष्‍ठ मिसाइल सिस्‍टम माना जाता है. स्वेदश में डिजाइन होने वाले ब्राह्मोस सुपरसोनिक क्रूज मिसाइलों का परीक्षण किया जा चुका है. डीएसी ने थल सेना के बैटल टैंक अर्जुन के लिए एआरवी की खरीद को भी मंजूरी दे दी है. इन्हें डीआरडीओ (डिफेंस रिसर्च ऐंड डिवेलपमेंट ऑर्गनाइजेशन) ने डिजाइन किया है और ये सरकार उपक्रम भारत अर्थ मूवर्स लिमिटेड द्वारा मैन्युफैक्चर किये जायेंगे. रूस के साथ मिसाइलों की डील को ऐसे समय पर अंजाम दिया गया है जब अमेरिका ने इस देश से होने वाली हथियारों की डील पर बैन लगा दिया है. अमेरिका ने कैटसा कानून के तहत उन सभी देशों और उनके संस्थानों पर प्रतिबंध लगाने का ऐलान किया है जो रूस से सैन्य सामान खरीदेंगे. 

भारत में 11 अक्टूबर 2001 को देश की रक्षा एवं सुरक्षा में सुधार हेतु की जाने वाली खरीद और अधिग्रहण के लिए रक्षा अधिग्रहण परिषद की स्थापना की गई. रक्षा अधिग्रहण परिषद (डीएसी) रक्षा मंत्रालय के तहत एक व्यापक संरचना, रक्षा खरीद योजना प्रक्रिया के समग्र मार्गदर्शन के लिए गठित की गई थी. डीएसी रक्षा खरीद को लेकर निर्णय लेने वाली रक्षा मंत्रालय की शीर्ष संस्था है. इसका उद्देश्य देश की रक्षा के लिए ख़रीदे जाने वाले हथियारों और उपकरणों की खरीद के लिए मंजूरी प्रदान करना तथा मंत्रालय के समक्ष इस संबंध में अपने विचार एवं रिपोर्ट रखना है. डीएसी का उद्देश्य मांग की गई क्षमताओं के संदर्भ में सशस्त्र बलों के अनुमोदित आवश्यकताओं की शीघ्र खरीद, और आवंटित बजटीय संसाधनों का बेहतर उपयोग करके, निर्धारित समय सीमा को सुनिश्चित करना है. डीएसी सैन्य सामान के अधिग्रहण के लिए दिशानिर्देश भी जारी करता है.

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