मासिक करेंट अफेयर्स

11 December 2018

फिच रेटिंग्स ने भारत की जीडीपी दर के अनुमान को घटाकर 7.2% किया

रेटिंग एजेंसी फिच ने चालू वित्त वर्ष 2018-19 के लिए भारत की जीडीपी ग्रोथ का अनुमान 7.8% से घटाकर 7.2% कर दिया है. फिच ने भारत में ज्यादा लागत और नकदी की कम उपलब्धता की वजह से अनुमान घटाया है. फिच ने कहा कि अगले वित्त वर्ष (2019-20) और (2020-21) में भारत की आर्थिक वृद्धि दर 7 प्रतिशत और 7.1 प्रतिशत रहने का अनुमान है. वित्त वर्ष 2017-18 में देश की अर्थव्यवस्था 6.7 प्रतिशत की दर से आगे बढ़ी थी. पहले फिच ने सितंबर में जीडीपी ग्रोथ 7.8 % रहने का अनुमान जताया था. इससे पहले फिच ने सितंबर में वृद्धि दर के 7.8 प्रतिशत और जून में 7.4 प्रतिशत रहने का अनुमान जताया था. फिच का नया अनुमान चालू वित्त वर्ष के लिए आरबीआई के 7.4 प्रतिशत के अपने पहले लगाए गए अनुमान से काफी कम है.

रेटिंग एजेंसी ने कहा, 'हमने जीडीपी आंकड़ों में अपेक्षा से कम तेजी, उच्च वित्तपोषण लागत और बाजार में नकदी की कमी को देखते हुए अनुमान घटाया गया है. हमें लगता है कि मार्च 2019 को समाप्त वित्त वर्ष में जीडीपी ग्रोथ 7.2 प्रतिशत रहेगी. एजेंसी ने कहा कि चालू वित्त वर्ष की दूसरी तिमाही (जुलाई-सितंबर) में जीडीपी ग्रोथ कम होकर 7.1 प्रतिशत पर रही. अप्रैल-जून में यह 8.2 प्रतिशत थी. फिच ने कहा, 'खपत कमजोर बनी हुई है जिसके चलते यह 8.6 प्रतिशत से गिरकर 7 प्रतिशत पर आ गई है. घरेलू मांग के अन्य कारक बेहतर स्थिति में है, खासकर निवेश 2017 की दूसरी छमाही के बाद लगातार बढ़ा है'।

रेटिंग एजेंसी का कहना है कि अगले साल होने वाले आम चुनावों को देखते हुए ऐसी उम्मीद है कि भारत की वित्तीय नीतियां वृद्धि को बढ़ावा देने वाली होंगी. साथ ही एजेंसी ने कहा कि साल 2019 के आखिर तक डॉलर के मुकाबले रुपया 75 रुपये प्रति डॉलर तक गिर सकता है. इस समय रुपया 71 रुपये प्रति डॉलर के आसपास चल रहा है. फिच ने कहा कि बैंकिंग क्षेत्र अभी भी एनपीए (NPA) के उच्च स्तर से जूझ रहा है, जबकि नॉन बैंकिंग फाइनेंशियल इंस्टीट्यूशंस IL&FS के डिफॉल्ट्स के बाद लिक्विडिटी की कमी की समस्या झेल रहे हैं.

फिच रेटिंग्स विश्व की तीन सबसे बड़ी रेटिंग एजेंसियों में से एक है. इसके अतिरिक्त अन्य दो प्रमुख एजेंसियां मूड़ीज़ और स्टैण्डर्ड एंड पूअर्स हैं. इसका मुख्यालय अमेरिका के न्यूयॉर्क में स्थित है. इसका पूर्व स्वामित्व हेअर्स्ट कारपोरेशन के पास है. क्रेडिट रेटिंग एजेंसी एक किस्म की कंपनी होती है जो क्रेडिट रेटिंग प्रदान करती है. यह ऋणी द्वारा समय पर ऋण के भुगतान अथवा डिफ़ॉल्ट की सम्भावना की योग्यता का अनुमान लगाती है. सिक्योरिटी व एक्सचेंज कमीशन ने वर्ष 2003 में कांग्रेस को एक रिपोर्ट जमा की जिसमे क्रेडिट रेटिंग एजेंसियों की प्रतिस्पर्धा विरोधी कार्य प्रणाली और ब्याज संबंधी विवादों से युक्त मुद्दों के लिए एक जांच बैठाने की योजना के बारे में विस्तारपूर्वक बताया गया था. क्रेडिट रेटिंग का प्रयोग निवेशकों, ऋण निर्गमित करने वाली संस्थाओं, निवेश बैंक, दलालों-व्यापारियों और सरकार द्वारा किया जाता है.

No comments:

Post a comment