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06 December 2018

कतर ने ओपेक समूह को छोड़ने की घोषणा की

कतर के ऊर्जा मंत्री साद अल-काबी ने 03 दिसंबर 2018 को घोषणा की कि कतर एक जनवरी 2019 से तेल निर्यातक देशों के संगठन ओपेक से बाहर हो जाएगा. काबी ने घोषणा में कहा कि यह राजनीतिक नहीं बल्कि तकनीकी और रणनीतिक फैसला है. कतर के एनर्जी मिनिस्टर साद अल-काबी ने कहा कि उनका देश अब गैस उत्पादन पर विशेष ध्यान देने जा रहा है, इसलिए तेल उत्पादकों का संगठन छोड़ने का फैसला लिया गया. उन्होंने कहा की कतर ने जनवरी 2019 में ओपेक की सदस्यता वापस लेने का फैसला किया और ओपेक को इसकी जानकारी दे दी है. 

गौरतलब है कि कतर ने यह बड़ा फैसला आगामी 6 दिसंबर को होने वाली ओपेक देशों की मीटिंग से ठीक पहले लिया है. वह ओपेक के गठन के एक वर्ष बाद ही 1961 से इसका सदस्य बन गया था. यह पहला मौका है जब 1960 में ओपेक के गठन के बाद किसी पश्चिमी एशियाई देश ने इससे बाहर निकलने का निर्णय लिया है. बहरहाल, यह जानना जरूरी है कि सऊदी अरब, यूएई, बहरीन और मिस्र जैसे पड़ोसी देशों के साथ कतर का कूटनीतिक संबंध लगातार बिगड़ता जा रहा है. दरअसल, इन देशों ने आतंकवाद का समर्थन करने के आरोप में कतर पर पिछले वर्ष जून से ही व्यापारिक एवं आवाजाही जैसी गतिविधियों पर रोक लगा रखी है. हालांकि कतर का कहना है कि यह फैसला किसी तरह के राजनीतिक दबाव में नहीं लिया गया है. 

काबी ने कहा कि कतर आगे भी कच्चा तेल का उत्पादन जारी रखेगा, लेकिन वह गैस उत्पादन पर अधिक ध्यान देने वाला है क्योंकि वह विश्व में एलएनजी का सबसे बड़ा निर्यातक है. काबी ने कहा, 'कच्चे तेल में हमारे लिए अधिक संभावनाएं नहीं हैं. हम वास्तविकता पर यकीन करते हैं. हमारी संभावनाएं गैस में हैं.' काबी ने कहा कि ओपेक को घोषणा से पहले ही इस निर्णय के बारे में सूचित कर दिया गया है. उन्होंने कहा की हम इस संगठन में छोटे प्लेयर हैं और हमें अपने विकास पर ध्यान देना है. इसलिए हम संगठन से अलग हो रहे हैं. 

हालांकि कतर बड़ा हिस्सेदार न होते भी ओपेक के लिए महत्वपूर्ण है. कतर 6 लाख बैरल प्रति दिन (bpd) का उत्पादन करता है. वहीं सऊदी अरब 1करोड़ 10 लाख bpd का उत्पादन करता है और दुनिया का सबसे बड़ा तेल उत्पादक और निर्यातक है. दोहा LNG के मामले में अपना महत्वपूर्ण स्थान रखता है. लेकिन कतर के फैसले का भारत पर ज्यादा असर नहीं पड़ेगा क्योंकि, भारत के प्रमुख तेल निर्यातक देश ईराक, सऊदी अरब और ईरान हैं. तेल के अतिरिक्त भारत के कतर के साथ ज्यादा व्यापारिक संबंध भी नहीं हैं. अमेरिकी प्रतिबंधों की वजह के भारत को भविष्य में यदि ईरान से आयात घटाना पड़ा तो वह कतर से आयात बढ़ाने का विकल्प चुन सकता है. साथ ही, यदि आने वाले समय में भारत और कतर के संबंध मित्रवत रहते हैं तो भारत को कतर से सस्ते दाम पर गैस मिल सकती है.

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