मासिक करेंट अफेयर्स

08 December 2018

विश्व मृदा दिवस

विश्वभर में 05 दिसंबर 2018 को ‘विश्व मृदा दिवस’ मनाया गया. इस दिवस को मनाने का मुख्य उद्देश्य किसानों और आम लोगों को मिट्टी की महत्ता के बारे में जागरूक करना है. इस दिवस को खाद्य व कृषि संगठन द्वारा मनाया जाता है. विश्व के बहुत से भागों में किसानो द्वारा ज्यादा रसायनिक खादों और कीड़ेमार दवाईओं का इस्तेमाल करने से मिट्टी के जैविक गुणों में कमी आने के कारण इसकी उपजाऊ क्षमता में गिरावट आ रही है और यह प्रदूशंन का भी शिकार हो रही है. इस लिए किसानो और आम जनता को इसकी सुरक्षा के लिए जागरूक करने की जरूरत है. विश्व मृदा दिवस 2018 की थीम "मृदा प्रदूषण रोको" है. संयुक्त राष्ट्र के अनुसार विश्व की कुल एक तिहाई मृदा का क्षरण हो चुका है. 

मृदा के गुणवत्ता को प्रभावित करने वाला एक प्रमुख कारक मृदा प्रदूषण भी है. मृदा प्रदूषण का खाद्यान्न, जल तथा वायु पर भी बहुत बुरा प्रभाव पड़ता है, जो प्रत्यक्ष रूप से स्वास्थ्य को प्रभावित करता है. मृदा प्रदूषण का प्रमुख कारण औद्योगिक प्रदूषण तथा ख़राब मृदा प्रबंधन है. इस दिन को मनाने का मुख्य उद्देश्य मिट्टी की गुणवत्ता को बेहतर बनाना है. यूएन की खाद्य एजेंसी के अनुसार, हमारे भोजन का 95 प्रतिशत हिस्सा मिट्टी से ही आता है. मिट्टी के स्वास्थ्य में सुधार लाने के लिए प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने वर्ष 2015 में मृदा स्वास्थ्य कार्ड योजना (एसएचसी) की शुरूआत की थी. इसके लिए भारत सरकार के कृषि एवं सहकारिता मंत्रालय ने पूरे देश में 14 करोड़ मृदा स्वास्थ्य कार्ड (एसएचसी) जारी करने का लक्ष्य रखा था.

वर्तमान में विश्व की संपूर्ण मृदा का 33 प्रतिशत पहले से ही बंजर या निम्नीकृत (Degraded) हो चुका है. उल्लेखनीय हैं कि हमारे भोजन का 95 प्रतिशत भाग मृदा से ही आता है. वर्तमान में 815 मिलियन लोगों का भोजन असुरक्षित है और 2 अरब लोग पोषक रूप से असुरक्षित हैं, लेकिन हम इसे मृदा के माध्यम से कम कर सकते हैं. इस दिवस का उद्देश्य मृदा स्वास्थ्य के प्रति तथा जीवन में मृदा के योगदान के प्रति लोगों में जागरूकता बढ़ाना है. 20 दिसंबर, 2013 को संयुक्त राष्ट्र महासभा ने एक संकल्प द्वारा 5 दिसंबर को प्रतिवर्ष ‘विश्व मृदा दिवस’ मनाने की घोषणा की थी. संयुक्त राष्ट्र महासभा ने इसी संकल्प के माध्यम से वर्ष 2015 को ‘अंतरराष्ट्रीय मृदा वर्ष’ के रूप में मनाने की घोषणा की थी.

No comments:

Post a Comment