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17 December 2018

दिल्ली हाई कोर्ट ने दवाओं की ऑनलाइन बिक्री पर लगाई रोक

दिल्ली हाईकोर्ट ने ऑनलाइन फार्मेसी (E-Pharmacy) द्वारा इंटरनेट पर दवाओं की बिक्री पर रोक लगा दी. इन दवाओं में डॉक्टर के पर्चे पर लिखी गईं दवाएं भी शामिल हैं. मुख्य न्यायाधीश राजेंद्र मेनन और न्यायमूर्ति वीके राव की पीठ ने उस याचिका पर अंतरिम आदेश दिया, जिसमें दवाओं की ऑनलाइन 'गैरकानूनी' बिक्री पर रोक लगाने की मांग की गई. अदालत ने इससे पहले इस याचिका पर केंद्र, दिल्ली सरकार, केंद्रीय औषधि मानक नियंत्रण संगठन, भारतीय फार्मेसी परिषद से जवाब मांगा. अदालत ने इस मामले में आगे की सुनवाई के लिए अगले साल 25 मार्च की तारीख तय की. 

डॉक्टर जहीर अहमद द्वारा दायर याचिका में कहा गया है कि दवाओं की ऑनलाइन गैरकानूनी बिक्री से दवाओं के दुरुपयोग जैसी समस्याएं पैदा हो सकती हैं. अधिवक्ता ने न्यायालय में कहा कि ड्रग्स एण्ड कॉस्मेटिक्स एक्ट 1940 और फॉर्मेसी एक्ट 1948 के अंतर्गत दवाओं के ऑनलाइन बिक्री अनुमति नहीं देता. जबकि मामले की याचिका दायर करने वाले डर्मेटोलॉजिस्ट जहीर अहमद ने कहा कि वर्ष 2015 में राज्यों के दवा नियंत्रक अधिकारियों को निदेश दिया गया था कि ऑनलाइन दवा बिक्री पर रोक लगाये, लेकिन इसे नहीं रोका जा सका. उन्होंने कहा कि कुछ दवा साइकोट्रॉपिक होती है जिसे ऑनलाइन आसानी से मंगाया जा सकता है और उसका प्रयोग आपराधिक या गलत ढंग से किया जा सकता है. इसमें कहा गया कि फिर भी इंटरनेट पर रोजाना लाखों दवाएं बेची जा रही हैं. कुछ दवाओं में नशीला पदार्थ होता है जो प्रतिजैविक (एंटीबायोटिक) रोधी जीवाणु पैदा कर सकता है जो न केवल मरीज बल्कि मानवता के लिए खतरा है.

यह सार्वजनिक जानकारी का विषय है कि कई मौकों पर ई कॉमर्स वेबसाइटें नकली उत्पाद बेचते हुए पकड़े गए हैं. उपभोक्ता सामग्री के विपरीत,दवाएं अत्यंत प्रभावशाली सामग्री होती हैं और गलत खुराक लेने या नकली दवा खाने का मरीज पर जानलेवा असर हो सकता है. बता दें कि इस साल सितंबर में स्वास्थ्य मंत्रालय ने दवाओं की ऑनलाइन बिक्री का एक ड्राफ्ट बनाया था. इसके मुताबिक, ऑनलाइन दवाओं की बिक्री के लिए ई फार्मेसी को एक केंद्रीय प्राधिकार के पास पंजीकरण करवाना होगा. इन कंपनियों को मादक द्रव्यों की बिक्री की अनुमति नहीं होगी. ऑनलाइन फार्मेसी को केंद्रीय औषध मानक नियंत्रण संगठन (सीडीएससीओ) के यहां पंजीकरण करवाना होगा.

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