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05 January 2019

अरुणाचल प्रदेश के पूर्वी सियांग जिले का 100 प्रतिशत विद्युतीकरण हुआ

अरुणाचल प्रदेश के पूर्व सियांग जिले ने प्रधानमंत्री सहज बिजली हर घर योजना (सौभाग्य योजना) के तहत 100 प्रतिशत विद्युतीकरण लक्ष्य हासिल किया है. राज्य के बिजली विभाग ने बताया है कि प्रधानमंत्री सहज बिजली हर घर योजना, सौभाग्य के अंतर्गत शत-प्रतिशत विद्युतीकरण का लक्ष्य प्राप्त किया गया है. पासी घाट बिजली डिवीज़न ने बताया कि पहले से छूटे हुए दो हजार 662 घरों का विद्युतीकरण पिछले साल दिसंबर के अंत तक कर दिया गया. बिजली विभाग ने राज्य में दीन दयाल उपाध्याय-ग्राम ज्योति योजना के तहत 1,483 गांवों का विद्युतीकरण किया है, जिससे ग्रामीण लोगों को फ्लैगशिप योजना के तहत बिजली कनेक्टिविटी दी गई है.

राज्य के पासीघाट विद्युत प्रभाग ने 2,662 घरों का विद्युतीकरण किया है जो पहले दिसंबर 2017 के अंत तक छोड़ दिए गए थे. संभाग ने पंगिन उप-विभाजन नारी-कोयू को छोड़कर जिले के अंतर्गत कुल 71 गांवों को कवर करने का लक्ष्य हासिल किया है. इसमें रुक्सिन में 29, पासीघाट में 23 और पूर्वी सियांग जिले की असम के मीबो उप-डिवीजनों में 19 गांव शामिल हैं. विभाग ने कवर किए गए गांवों को ऊर्जावान बनाने के लिए ट्रांसफार्मर की स्थापना को लगभग पूरा कर लिया है. पासीघाट विद्युत डिवीजन पूर्वी सियांग जिले में पासीघाट विद्युत सर्कल-2 के अंतर्गत आता है.

प्रधानमंत्री सहज बिजली हर घर योजना (सौभाग्य योजना) के तहत लाभार्थियों की पहचान और पंजीकरण करने के लिए, एक मोबाइल एप्प का उपयोग किया जाएगा. इस योजना के निःशुल्क मानदंडों के तहत नहीं आने वाले परिवारों को 500 रुपये की राशि पर बिजली प्रदान की जाएगी. पहाड़ी या आदिवासी क्षेत्रों जैसे दूरदराज के इलाकों में जहां बिजली उपलब्ध नहीं है, वहां के परिवारों को 200 से 300 वॉट (वाट पीक) के सौर ऊर्जा पैक उपलब्ध कराए जाएंगे. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने पंडित दीनदयाल उपाध्याय की जयंती के अवसर पर 25 सितंबर, 2017 को 16320 करोड़ रुपये की प्रधानमंत्री सहज बिजली हर घर योजना की शुरुआत की. 

इस योजना का उद्देश्य 31 मार्च, 2019 तक देश में सार्वभौमिक घरेलू विद्युतीकरण के लक्ष्य को प्राप्त करना है. यह योजना ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों के सभी शेष घरों में अंतिम मील कनेक्टिविटी और बिजली कनेक्शन प्रदान करने की परिकल्पना करती है. राज्य विद्युत विभागों और डिस्कौम के सहयोग से, योजना शुरू होने के बाद से 1.65 करोड़ से अधिक घर पहले ही जुड़ चुके हैं. वर्ष 2011 की जाति जनगणना और सामाजिक-आर्थिक आधार पर मुफ्त बिजली के लिए पात्रता की पहचान की जाएगी. ग्रामीण विद्युतीकरण निगम लिमिटेड (आरईसी) को सौभाग्य योजना के कार्यान्वयन के लिए नोडल एजेंसी के रूप में नियुक्त किया गया है.

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