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14 January 2019

गुजरात आर्थिक रूप से पिछड़े सवर्णों को 10% आरक्षण देने वाला पहला राज्य बना

आर्थिक रूप से कमजोर सवर्णों को सरकारी नौकरियों और शैक्षिक संस्थानों में 10% आरक्षण देने वाले मोदी सरकार के ऐतिहासिक फैसले को गुजरात सरकार ने लागू करने का फैसला किया है. गुजरात सरकार ने ऐलान किया था कि वह 14 जनवरी से आर्थिक रूप से कमजोर सामान्‍य वर्ग को सरकारी नौकरियों और शिक्षण संस्‍थाओं में 10 फीसदी आरक्षण देने वाले कानून को लागू करेगी. इसके साथ ही गुजरात आर्थिक रूप से कमजोर सवर्णों को आरक्षण देने वाला पहला राज्य बन गया है. बता दें कि सामान्य वर्ग के आर्थिक रुप से पिछड़े लोगों को नौकरी और शिक्षा में 10 फीसदी आरक्षण देने के फैसले पर नरेंद्र मोदी कैबिनेट ने 7 जनवरी को मुहर लगाई थी. 8 जनवरी को इसके लिए लोकसभा में संविधान का 124वां संशोधन विधेयक 2019 पेश किया गया. इसी दिन ये बिल लोकसभा में पास हो गया, इस बिल के समर्थन में 323 वोट पड़े जबकि इस बिल के विपक्ष में 3 वोट पड़े थे.

इसके बाद 9 जनवरी को इस बिल को राज्यसभा में पेश किया गया. इसके लिए राज्यसभा की बैठक को एक दिन के लिए बढ़ाया गया. राज्यसभा में भी इस बिल पर लंबी बहस हुई और उसी दिन इस बिल को सदन से पास कर दिया गया. राज्यसभा में इस बिल के पक्ष में 165 वोट पड़े थे, जबकि 7 वोट इसके विपक्ष में किए गए थे. वहीं दोनों सदनों से बिल पास होने के बाद इसे आखिरी मंजूरी के लिए राष्ट्रपति के पास भेजा गया. जिस पर आखिरकार राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद ने शनिवार को मंजूदी देते हुए हस्ताक्षर कर दिए थे. बता दें कि ये आरक्षण इस वक्त एससी, एसटी और ओबीसी समुदाय के लोगों को मिलने वाले 49.5 फीसदी रिजर्वेशन के अलावा होगा.

मोदी सरकार ने इस फैसले के साथ ही कुछ शर्तें भी लागू कर दी हैं. इस फैसले के तहत जिनकी आय 8 लाख रुपये सालाना से कम हो उन्हें इस 10% आरक्षण का लाभ मिलेगा. इसके अलावा जिसके पास 5 हेक्टेयर से कम की जमीन होगी उन्हें भी 10 फीसदी आरक्षण का लाभ मिलेगा. वहीं जिन सवर्णों के पास 1000 स्क्वायर फीट से कम का घर होगा, जिनके पास निगम की 109 गज से कम अधिसूचित जमीन होगी, 209 गज से कम की गैर-अधिसूचित जमीन होगी और जो भी किसी आरक्षण के अंतर्गत नहीं आते होंगे उन सभी को इसका लाभ मिलेगा.

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