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17 January 2019

सरकार ने 2015-18 के गांधी शांति पुरस्कार विजेताओं की घोषणा की

केंद्र सरकार ने 16 जनवरी 2019 को पिछले चार वर्षों के लिए गांधी शांति पुरस्कारों की घोषणा की है. केंद्र सरकार द्वारा 2015 से 2018 तक के गांधी शांति पुरस्कार विजेताओं के नामों की घोषणा की गई. इस पुरस्कार से अंतिम बार वर्ष 2014 में भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो) को सम्मानित किया गया था. हालांकि, सरकार ने 2014 के बाद से इस पुरस्कार से किसी को सम्मानित नहीं किया था. इन पुरस्कारों के विजेताओं का फैसला एक ज्यूरी ने किया जिसमें प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, भारत के चीफ जस्टिस, जस्टिस रंजन गोगोई, लोकसभा स्पीकर सुमित्रा महाजन, विपक्ष नेता मल्लिकार्जुन खडग़े तथा लालकृष्ण आडवाणी शामिल थे.

सरकार की ओर से जारी विज्ञप्ति में कहा गया है कि वर्ष 2015 के लिए कन्याकुमारी के विवेकानंद केंद्र, वर्ष 2016 के लिए अक्षय पात्र फाउंडेशन और सुलभ इंटरनेशनल को संयुक्त रूप से, वर्ष 2017 के लिए एकई अभियान ट्रस्ट और,वर्ष 2018 के लिए विश्व स्वास्थ्य संगठन के सद्भावना दूत योहेई ससाकावा को इस पुरस्कार से नवाजा गया है. विवेकानंद केंद्र को शिक्षा एवं ग्रामीण विकास, अक्षय पात्र को देशभर में बच्चों को मिड डे मील वितरण, सुलभ इंटरनेशनल को सिर पर मैला ढोने से मुक्ति दिलाने, एकई को आदिवासी व ग्रामीण क्षेत्र में शिक्षा के प्रसार तथा योहेई को कुष्ठरोग उन्मूलन में योगदान के लिए दिया गया है.

भारत सरकार द्वारा अंतर्राष्ट्रीय गाँधी शांति पुरस्कार भारत के राष्ट्रपिता महात्मा गांधी के नाम पर दिया जाने वाला वार्षिक पुरस्कार है. गांधी जी के शांति सिद्धांतों को श्रद्धांजलि स्वरूप, भारत सरकार ने यह पुरस्कार 1995 में उनके 125वें जन्म-दिवस पर आरंभ किया था. यह वार्षिक पुरस्कार उन व्यक्तियों या संस्थाओं को दिया जाता है, जिन्होंने सामाजिक, आर्थिक एवं राजनीतिक बदलावों को अहिंसा एवं अन्य गांधीवादी तरीकों द्वारा प्राप्त किया है. पुरस्कार में एक करोड़ रुपये की धनराशि, प्रशस्तिपत्र और एक स्मारिका दी जाती है. यह सभी राष्ट्रों, जातियों, लिंग के लोगों के लिए खुला है. प्रथम गाँधी शांति पुरस्कार 1995 में तंजानिया के प्रथम राष्ट्रपति के जूलियस नायरेरे को प्रदान किया गया था. वर्ष 2013 में यह पुरस्कार पर्यावरणवादी और समाजिक कार्यकर्ता चंडीप्रसाद भट्ट को दिया गया था. 

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