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16 January 2019

केन्द्र सरकार ने देशभर के उच्च शिक्षा संस्थानों तथा विश्वविद्यालयों में करीब 25 प्रतिशत सीटें बढ़ाने की घोषणा की

केन्द्रीय मानव संसाधन विकास मंत्रालय ने शिक्षण सत्र 2019-20 से सामान्य श्रेणी के आर्थिक रूप से कमजोरवर्ग के लिए 10 प्रतिशत आरक्षण को लागू करने  और देशभर में उच्च शिक्षा संस्थानों तथा विश्वविद्यालयों में करीब 25 प्रतिशत सीटें बढ़ाने की घोषणा की है. मानव संसाधन विकास मंत्री प्रकाश जावड़ेकर ने बताया कि मंत्रालय, विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (यूजीसी) और अखिल भारतीय तकनीकी शिक्षा परिषद (एआईसीटीई) के अधिकारियों की बैठक में यह फैसला किया गया. उन्होंने कहा की शिक्षण सत्र 2019-2020 से ही आरक्षण लागू हो जाएगा. करीब
25 प्रतिशत सीटें बढ़ाई जाएंगी ताकि अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति तथा अन्य श्रेणियों के तहत मौजूदा कोटा प्रभावित नहीं हो. उन्होंने यह भी कहा कि निजी विश्वविद्यालय भी आरक्षण लागू करने के लिए तैयार हैं.

बता दें कि राष्‍ट्रपति रामनाथ कोविंद के हस्‍ताक्षर के साथ ही सवर्णों को मिलने वाले 10 प्रतिशत आरक्षण को लागू करने की मंजूरी मिल गई. इस ऐतिहासिक संविधान संशोधन विधेयक को जनवरी में ही लोकसभा और राज्यसभा की मंजूरी मिली थी. राज्यसभा ने इस विधेयक को सात के मुकाबले 165 मतों से मंजूरी दी थी. वहीं इससे ठीक एक दिन पहले लोकसभा ने इस विधेयक को मंजूरी दी थी, जहां मतदान में तीन सदस्यों ने इसके विरोध में मत दिया था. इस संविधान संशोधन में दो अनुच्छेद 15 और और 16 में बदलाव किया गया है. अनुच्छेद 15 जाति, धर्म, जाति, लिंग या जन्म स्थान के आधार पर भेदभाव को रोकता है वहीं अनुच्छेद 16 सरकारी नौकरियों में सबके लिए एक समान अवसर उपलब्ध कराने की बात करता है.

इस आरक्षण का लाभ वही परिवार उठा सकेंगे जो लोग EWS कैटेगरी (गरीब) में आते हैं, जिन सवर्ण परिवारों की आय 8 लाख रुपए सालाना से कम है, जिन सवर्ण किसानों के पास 5 हेक्टेयर से कम ज़मीन है. लाभार्थी का 1000 स्क्वायर फ़ीट से कम ज़मीन वाला घर हो. उन्हें भी आरक्षण का लाभ मिलेगा जिनका गांव या छोटे शहर (म्युनिसिपलिटी एरिया) में 209 गज से छोटा प्लॉट हो.

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